162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

संस्थाएं

भरूच

162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

जैन स्थानक में आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में मर्यादा महोत्सव के कार्यक्रम का समायोजना हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुड टू गुड बनने की प्रयोगशाला है मर्यादा, Man to supermen का फार्मूला है मर्यादा, Most Powerfull बनने का Attractive Art है मर्यादा। मर्यादा महोत्सव का आकर्षण क्यों रहा है! वर्तमान में है भविष्य में रहेगा? मर्यादोत्सव ऑक्सीजन ग्रहण की क्षमता देता है। प्रसन्नता का प्रोटीन देता है, विनम्रता का विटामिन देता है सहिष्णुता का सीरप देता है, वात्सल्य की वर्षा देता है, कार्य कुशलता का कार्बोहाइड्रेट देता है। मर्यादा महोत्सव योगक्षेम की प्रयोगशाला है। यह आयोजन आमोद-प्रमोद का उत्सव नहीं चार तीर्थ के उत्थान का संकल्प है। मर्यादा महोत्सव कहता है गम को करें डिलीट, खुशी को सेव, रिश्तों को रिचार्ज, डिसिप्लीन को डाउनलोड, गुस्से को होल्ड, मुस्कान को सेंड करे। जिंदगी को शानदार बनाएं सेवा का मूल्यांकन तेरापंथ की अमूल्य विरासत है। करोड़पति बेटों की मां की जैसी सेवा घर में नहीं होती। वैसी सेवा तेरापंथ में होती है। साधु साध्वी चिंता की चादर आचार्य के कंधों पर डालकर निंश्चिंत हो जाते हैं। आपने कहा मर्यादा रहे रहन सहन में, खान पान में, शयन जागरण में, कहां कैसे कपड़े पहने, स्थान की गरिमा बनाएं रखे भावों में रहे। मर्यादा की ले मशाल, संघ बना बेमिसाल, मर्यादा की ढाल कमाल, कर दे मालामाल, हमारा संघ, हमारे गुरू और हम बनेंगे नम्बर 1 साध्वी मुक्ताप्रभा जी ने कहा कि मर्यादा को पवित्र नदी के साथ तुलना की है। मर्यादा को पवित्र पुस्तक और ईख के जैसे बताया और आचार्य भिक्षु ने राजमार्ग पर चलने की सलाह दी। इस बारे में विस्तार से बताया। साध्वी कुमुदप्रभा जी ने मर्यादा पुरूषोत्तम भिक्षु पुण्य निधान कहलाए गीत का अपनी मधुर स्वर लहरियों के साथ संगान किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी विनम्रयशाजी ने किया। वड़ोदरा,भरूच, अंकलेश्वर तेरापंथ महिला मंडल ने गीत का संगान किया।