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162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में तेरापंथ धर्मसंघ का कुंभ 162वाँ मर्यादा महोत्सव समारोह में उद्बोघन प्रदान करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- धर्म उत्कृष्ट मंगल है अहिंसा, संयम, तप धर्म के लक्षण है। जिसका मन धर्म में रमा रहता है उसे देवता भी नमस्कार करते है। धर्म की प्रेरणा देने वाले संत, आचार्य आदि होते हैं। आचार्य भिक्षु तेरापंथ के प्रथम प्रवर्तक थे। वे एक निर्मल आचारवान औऱ तत्ववेत्ता आचार्य ही नहीं थे, अपितु कुशल संघ संगठनकार भी थे। उन्होंने धर्म संघ को सुव्यवस्थित बनाने के लिए मर्यादाओं का निर्माण किया। मर्यादा हालाहल नहीं गंगाजल है, मर्यादा संघर्ष नहीं उत्कर्ष है, मर्यादा बंधन नहीं निबंध है। मुनि ने आगे कहा- आचार्य भिक्षु भलीभांति जानते थे कि सामुदायिक जीवन में सामूहिक साधना में मर्यादाएं अत्यन्त आवश्यक है। यदि मर्यादाएं नहीं है तो नाना प्रकार की कठिनाईयां आएगी। आज बसंत पंचमी है जैसे प्रकृति हरी भरी खिली रहती है उसी प्रकार व्यक्ति को हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। सेवा भाव रखना चाहिए। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल की युवतियों द्वारा मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण उपाध्यक्ष बजरंग डागा ने किया। आभार संगठन मंत्री पवन बेंगानी व संचालन मुनि परमानंद ने किया।