ग्रंथों, पंथों और संतों का उपयोग कर प्राप्त करें ज्ञान : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

डीडवाना। 02 फरवरी, 2026

ग्रंथों, पंथों और संतों का उपयोग कर प्राप्त करें ज्ञान : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी सोमवार प्रातःकाल की मंगल बेला में अपनी धवल सेना के साथ कोलिया से गतिमान हुए। डीडवाना के श्रद्धालु अपने आराध्य की अगवानी में कोलिया में ही पहुंचना प्रारंभ हो गए थे। मार्ग में गांव के लोगों, स्कूल के विद्यार्थियों ने पूज्य प्रवर के दर्शन किए एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। डीडवाना में प्रवेश करते-करते श्रद्धालुओं की भीड़ जुलूस के रूप में परिवर्तित हो गई। विभिन्न समाज के लोगों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुस्लिम समाज के लोगों ने शहर काजी के साथ आचार्य प्रवर का अभिनंदन किया। लगभग 12 कि.मी. का विहार संपन्न कर आचार्य प्रवर डीडवाना के अग्रवाल भवन मे एक दिवसीय प्रवास हेतु पधारे।
डीडवाना की धरा पर आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अमृत देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि ज्ञान, प्रकाश करने वाला होता है, इसलिए व्यक्ति को जितना संभव हो सके ज्ञान प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान के दो प्रकार को सकता है, एक लौकिक विद्याओं का ज्ञान और दूसरा आध्यात्मिक विद्या का ज्ञान। लौकिक विद्याओं के ज्ञान में शिल्प कला, भूगोल, खगोल, तकनीकी ज्ञान, नृत्य कला, आदि और अध्यात्म विद्या के ज्ञान में आत्मा, परमात्मा, पुनर्जन्म, पाप-पुण्य, आदि की जानकारी होती है। अध्यात्म विद्या का ज्ञान प्राचीन ग्रंथों से सभी मिल सकता है। संस्कृत, पालि, आदि भाषाओं में अनेक ग्रंथ है जिन्हें पढ़कर ज्ञान-प्राप्त किया जा सकता है। एक ज्ञान भीतर से भी उत्पन्न हो जाता है। जिसे अतीन्द्रिय ज्ञान कहते हैं। यह ज्ञान आत्मा से प्रकट होता है जो साधना करके प्राप्त हो सकता है जो महान साधक, ऋषि महर्षियों को प्राप्त होता है। ग्रंथों को पढ़ने से स्वाध्याय होता है उससे ज्ञान की प्राप्ति व वृद्धि हो सकती है। ग्रंथों, पंथों, और संतों का बढ़िया उपयोग करके व्यक्ति ज्ञान भी प्राप्त कर सकता है और आत्म कल्याण की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
यह धरती का सौभाग्य है कि धरती पर संत लोग भी है जिनकी संगति और उपदेशों से सम्यक् ज्ञान प्राप्त हो सकता है और व्यक्ति सुख और शांति को प्राप्त कर सकता है। आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि हम लोग डीडवाना आए हैं। यहां पहले ही आना हुआ। यहां के लोगों में आपसी सद्भाव बना रहे और नैतिकता, आदि का विकास हो। आचार्यश्री के स्वागत में स्वागताध्यक्ष धर्मेन्द्रसिंह मुणोत, सुरेश घोड़ावत ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। स्थानीय तेरापंथ महिला मंडल ने गीत का संगान किया। सुरेश चंद चोपड़ा ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। डीडवाना की बहन-बेटियों ने भी स्वागत में अपनी प्रस्तुति दी। अग्रवाल समाज की महिलाओं ने गीत प्रस्तुत किया। अग्रवाल समाज की ओर से हरीश मोदी, आदि सदस्यों ने अभिवंदन पत्र का वाचन किया और आचार्यश्री के समक्ष अभिनंदन पत्र अर्पित किया।