दुर्लभ मानव जीवन में धर्म करने का करें प्रयास : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

01 फरवरी, 2026

दुर्लभ मानव जीवन में धर्म करने का करें प्रयास : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखंड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज रविवार प्रातः कैराप से मंगल प्रस्थान किया और कोलिया गांव स्थित माहेश्वरी भवन में पधारे। आचार्य प्रवर के स्वागत में पूर्व सरपंच सुखाराम डेडवारिया, नगरपालिका पार्षद प्रतिनिधि कमलेश पंवार, रामावतार सोनी ने भावाभिव्यक्ति दी। नरेन्द्र सिंघी ने अपनी अभिव्यक्ति दी तथा सिंघी परिवार ने गीत का संगान किया। सरपंच प्रतिनिधि कुशल ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी।
मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अमृत देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि हमें मनुष्य जीवन प्राप्त है। 84 लाख जीव योनियों में मनुष्य जन्म को दुर्लभ बताया गया है। मनुष्य जन्म मिल गया और यदि इसे पापों में, व्यसनों में गंवा दिया तो पुनः यह जन्म कब मिले, कहना मुश्किल है। हम भाग्यशाली हैं कि यह दुर्लभ मानव जीवन वर्तमान में प्राप्त है। इस मनुष्य जीवन को हमें पापों में नहीं गंवाकर इसका उपयोग धर्म, ध्यान, साधना, आराधना में करें तो इससे मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकती है।
इस मानव जीवन को व्यसनों में, पापों में गंवा देना एक नासमझी की बात हो जाती है। जैसे किसी व्यक्ति को सोने का थाल मिल जाए और वह उसका उपयोग कूड़ा-करकट फेंकने में करे, खाना खाने व खिलाने में न करे। इसी प्रकार किसी को अमृत प्राप्त हो जाए तो उसे पीने में उपयोग न करके गंदे पैर धोने में करता है। किसी को चिंतामणि रत्न मिल जाए और उस रत्न का प्रयोग कौवे को भगाने के लिए करे तो ये सभी कार्य व्यक्ति की अज्ञानता या मूर्खता के द्योतक हैं। इसी प्रकार जो व्यक्ति प्रमत्त होकर दुर्लभ मानव जीवन को व्यर्थ गंवाता है, वह भी इन्हीं मूर्ख व्यक्तियों की तरह होता है। अतः इस मानव जीवन में हम धर्म करें। यह परमात्म पद को पाने का एक रास्ता हमें मिला है। इसे दुर्व्यसनों, लड़ाई-झगड़ा आदि में नहीं गंवाना चाहिए। बेईमानी व धोखाधड़ी से बचने का प्रयास करना चाहिए। कोलिया गांव।