गुरुवाणी/ केन्द्र
किसी की आत्मा का कल्याण करना है लोकोत्तर दया : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखंड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के छोटी खाटू प्रवास का आज अंतिम दिवस पूज्य प्रवर की मंगल सन्निधि में आज आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के तीसरे चरण का शुभारंभ हुआ। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को अमृत देशना प्रदान करते हुए कहा कि शास्त्र में कहा गया है कि पहले ज्ञान फिर दया अर्थात् आचरण। सम्यक् ज्ञान के अनुरूप किया गया आचरण अच्छा आचरण होता है।
दया शब्द बहुत प्रसिद्ध है। आचार्य भिक्षु के साहित्य में भी हमें दया की बात मिलती है। वर्तमान में आचार्यश्री भिक्षु का जन्म त्रिशताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। आज से आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के तृतीय चरण का त्रिदिवसीय समारोह शुरू हुआ है। आचार्य भिक्षु का साहित्य भी हमें सिद्धान्त के संदर्भ में मिलता है। अनुकंपा या दया अनेक रूपों में देखी जा सकती है। आचार्यश्री भिक्षु ने दया का विश्लेषण करते हुए उसके दो रूप बताए हैं- एक आध्यात्मिक अर्थात् लोकोत्तर दया और दूसरी सांसारिेक अर्थात् लौकिक दया।
आचार्य भिक्षु ने कहा कि जीव अपने आयुष्य बल से जी रहे हैं, इनका जीना हमारी दया नहीं है। अनेक जीव, प्राणी, मनुष्य आदि मृत्यु को प्राप्त होते हैं, वे अपने आयुष्य के हिसाब से मर जाते हैं। उसमें हमें कोई पाप नहीं लगता है। यदि कोई व्यक्ति हिंसा करता है तो वही हिंसा के फल का भागीदार होता है। छः काय रूप जीवों को मारने का त्याग करना अहिंसा रूप दया है। किसी की आत्मा का कल्याण करना लोकोत्तर दया है और किसी की शारीरिक संदर्भ की सेवा करना, बचाना लौकिक दया है। आचार्य प्रवर ने संतों द्वारा चोरों को दिए गए उपदेश से संदर्भित दृष्टान्त बताते हुए कहा कि संतों द्वारा चोरों को दिए गए उपदेश से दो कार्य हुए, पहला यह कि चोरों ने आजीवन चोरी करने का त्याग किया जो आत्म कल्याण का कार्य हुआ- यह लोकोत्तर दया का कार्य है। दूसरा यह कि चोरों द्वारा चोरी का त्याग किए जाने से सेठ का धन चोरी होने से बच गया तो यह भौतिक कार्य हुआ यह लौकिक कार्य हुआ। इस दृष्टान्त से यह समझा जा सकता है कि कई बार मूल कार्य से अनेक कार्य भी सिद्ध हो सकते हैं। आचार्य प्रवर ने कहा कि छोटी खाटू में खूब धर्म की भावना बनी रहे। मुनि मेघकुमारजी ने अपनी पैतृक भूमि पर आचार्य प्रवर का अभिनंदन किया। शशि सेठिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल-छोटी खाटू ने आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के संदर्भ में गीत की प्रस्तुति दी।
छोटी खाटू विद्यालय के प्रिंसीपल सुखवीर डूडी, माली समाज की ओर से भंवरलाल टाक, जाट समाज की ओर से रामेश्वर खींचड़, माहेश्वरी समाज की ओर से कालूराम सारड़ा, अमित सारड़ा, पारीख समाज की ओर से नवरतनमल पारिख, नवल समाज की ओर से लोकेश नवल, विश्व हिन्दू परिषद् की ओर से प्रकाश सारड़ा, पूर्व सरपंच कल्याण सिंह राठौड़, डॉ. दिलीप चौधरी, आर एस एस की ओर से दिनेश चौधरी, मुस्लिम समाज की ओर से सरवर कुरेशी, सैन समाज की ओर से बजरंग सैन, स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष डालमचंद धारीवाल आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उपस्थित जनता को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आचार्य प्रवर की यात्रा व्यवस्था से संदर्भित दायित्व हस्तांतरण का उपक्रम हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव समिति के महामंत्री प्रकाश बेताला ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी तथा योगक्षेम वर्ष व्यवस्था समिति-लाडनूं की ओर से संगीत की प्रस्तुति दी गई। तदुपरांत आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव छोटी खाटू के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों को जैन ध्वज प्रदान कर व्यवस्था का हस्तांतरण हुआ।