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162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन
मर्यादा और अनुशासन से ही विकास होता है। तेरापंथ धर्म संघ में एक आचार्य एक आचार एक विचार और ताण, शारण, सेवा मर्यादा ही प्राण तत्व है। आचार्य भिक्षु द्वारा लिखी मर्यादा आज भी क्षुण है। जयाचार्य ने महोत्सव का रूप दे दिया। आचार्यश्री महाश्रमणजी के नेत्तृत्व में सात सौ से अधिक साधु-सध्वियां एक आचार्य की आज्ञा में है। छोटी खाटू में 162वां मर्यादा महोत्सव विशाल रूप में हो रहा है। देश में अनेक स्थानों पर आयोजित है। यह उद्गार शासन गौरव साध्वी राजीमती ने नोखा में कहे। तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा श्रद्धा भव गीत का संगान किया गया। साध्वियों द्वारा मर्यादा ही प्राण है गितिका से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। डा. प्रेम कुमार मरोठी, सभा उपाध्यक्ष लाल चन्द वेले, कवि इन्द्रचन्द बैद अध्यक्षा प्रिती मरोठी ने अपने विचार रखे।