162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

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162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ द्वारा समग्र देश में 162 वें मर्यादा महोत्सव को बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। स्थानीय स्तर पर उनके ही सुशिष्य मुनि डॉ. मदन कुमार जी, शासन श्री साध्वी मधुबाला जी एवं प्रोफेसर डॉक्टर साध्वी मंगल प्रज्ञा जी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, सिटीलाइट में तेरापंथ धर्म संघ के 162 वें मर्यादा महोत्सव का शानदार आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए मुनि डॉ. मदन कुमार जी ने कहा - आचार्य भिक्षु महान साधक थे। वे आगमों के प्रखर ज्ञाता थे। उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ की स्थापना की, साथ ही उसकी दीर्घजीविता के लिए मर्यादाओं का निर्माण भी किया। यही कारण है कि तेरापंथ धर्म संघ आज प्रगति के नए-नए शिखरों पर आरोहण कर रहा है। श्रावक श्राविकाओं को भी अपने सांसारिक जीवन में मर्यादाओं एवं अनुशासन को स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा - प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में ध्यान और योग को स्थान दें, आवेश पर नियंत्रण करें, क्रोध-गुस्से का त्याग करें एवं भोजन में संयम अपनाएं। यह छोटी-छोटी मर्यादाएं भी जीवन को सुखमय, शांतिमय‍ और आनंदमय बनाने के लिए समर्थ है। शासनश्री साध्वी मधुबाला जी ने कहा -2 तेरापंथ की मर्यादाएं ही तेरापंथ का संविधान बन गई है। यहां एक ही गुरु की आज्ञा के अनुसार समग्र धर्म संघ चलता है। गुरु की आज्ञा के सिवाय एक पत्ता भी हिल नहीं सकता। साधु हो या साध्वी श्रावक हो या श्राविका हर कोई यहां पर गुरु आज्ञा को शिरोधार्य करता हैं। साध्वी प्रोफेसर डॉक्टर मंगल प्रज्ञा जी ने कहा- तेरापंथ धर्म संघ आचार्य श्री भिक्षु की साधना का प्रतिफल है। इसे आचार्य श्री जयाचार्य, आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ एवं वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी जैसे महाप्रतापी आचार्य प्राप्त हुए हैं। तेरापंथ धर्मसंघ उसकी मर्यादाओं के फलस्वरूप ही विलक्षण धर्मसंघ बना है। मर्यादाएं तेरापंथ धर्म संघ की आन बान और शान है।
तेरापंथ नाम का वटवृक्ष आज फला फूल है उसके मूल में है तेरापंथ की मर्यादाएं। आज के दिन हर व्यक्ति को यह सोचना है कि मेरे परिवार में मर्यादा और अनुशासन कितना है? पिछले दरवाजे से नशे का दूषण भी कुछ-कुछ स्थानों पर प्रवेश कर रहा है। आज के दिन प्रत्येक व्यक्ति नशा मुक्त रहने का संकल्प करें यह अपेक्षित है। मुनि संयम कुमार जी, कल्प कुमार जी एवं साध्वियों द्वारा प्राग वक्तव्य दिए गए एवं मधुर गीत का संगान किया गया। तेरापंथी सभा अध्यक्ष हजारीमल भोगर ने स्वागत वक्तव्य दिया। संचालन साध्वी मंजूलयशा जी ने किया।