मानव में मानवता नहीं तो मानव भी दानव

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मानव में मानवता नहीं तो मानव भी दानव

मायावरम् (तमिलनाडु)
भगवान महावीर ने सभी जीवों के लिए चार बातों की दुर्लभता बताई। चार दुर्लभ बातों में एक दुर्लभ बात हैमनुष्य जीवन। आज मनुष्य तो बहुत हैं, पर मनुष्यता नहीं है। इंसान तो है, पर इंसानियत नहीं है। एकमात्र मनुष्य ही ऐसा प्राणी है, जो अपना आत्म चिंतन कर सकता है। निम्न विचार मुनि अर्हत कुमार जी ने कहे। मुनिश्री ने आगे कहा कि चार गति, चौरासी लाख जीव योनी में भटकते-भटकते बहुत मुश्किल से यह मनुष्य भव मिला। अगर हमने इसकी सार्थकता नहीं समझी, तो यह भव मिला, न मिला, हमारे लिए एक समान है। मनुष्य गति प्राप्त करने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। हमें इसको व्यर्थ नहीं गँवाकर, इसका लाभ उठाकर, आत्मकल्याण के पथ पर अग्रसर होना चाहिए। मुनि भरत कुमार जी ने कहा कि सत्संग जीवन की दिशा व दशा बदलने में अहम भूमिका निभाती है। मुनि जयदीप कुमार जी ने भगवान महावीर पर गीत का संगान किया। स्थानकवासी समाज की ओर से महावीर नाहर एवं राजेंद्र पोकरणा ने मुनिश्री के स्वागत में अपने विचार व्यक्‍त किए।