जब तक व्यक्ति के पुण्य का उदय होता है वह सबको प्रिय लगता है। पुण्य क्षीण हो जाने पर प्रिय भी शत्रु बन जाता है। - आचार्य श्री भिक्षु
जब तक व्यक्ति के पुण्य का उदय होता है वह सबको प्रिय लगता है। पुण्य क्षीण हो जाने पर प्रिय भी शत्रु बन जाता है।