उनकी बुद्धि ही परमार्थत: बुद्धि है जो जिनधर्म का सेवन करते हैं। वह बुद्धि किस काम की, जिससे कर्म का बंधन हो। - आचार्य श्री भिक्षु
उनकी बुद्धि ही परमार्थत: बुद्धि है जो जिनधर्म का सेवन करते हैं। वह बुद्धि किस काम की, जिससे कर्म का बंधन हो।
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