छोड़ गई क्यों शासनमाता?

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साध्वी कर्णिकाश्री

छोड़ गई क्यों शासनमाता?

छोड़ गई क्यों शासनमाता?

साध्वी कर्णिकाश्री

छोड़ गई क्यों शासनमाता? तेरी याद हमें आए।
एक बार तो दर्शन दे दो, यही भावना हम भाएँ।।

अनमोल मणि तुम गण-सागर की, खूब बढ़ाया गण भंडार।
चलती रहती कलम तुम्हारी, अद्भुत तव रचना संसार।
सरस्वती की वरद-सुता का, हर पल सब गौरव गाए।।

कला, कनक, साध्वीप्रमुखा बन, गण का मान बढ़ाया था।
तुलसी विभू की अनुपम कृति ने नव इतिहास रचाया था।
स्वर्णिम ख्यात बनाने वाली, माँ की बलिहारी जाए।।

तुलसी महाप्रज्ञ के युग में काम किया तुमने जमकर।
महाश्रमण गुरुवर सन्निधि में, बहता था सुख का निर्झर।
त्रय-गुरुओं की दृष्टिराधिके! तेरी महिमा हम गाएँ।।

शासनमाता के चरणों में, श्रद्धाफूल चढ़ाएँ हम।
नाम करेंगे गण का ऊँचा, यह सौगात सजाएँ हम।
धरणी-अम्बर में माँ तेरा, जयनारा हम गूँजाएँ।।

लय: कलियुग बैठा मार