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हर पंछी का आश्वासन
हर पंछी का आश्वासन
साध्वी संयमलता
बासंती उत्सव ने पतझड़ का क्यों अहसास दिलाया है।
हर पल जिसने दी शीतल छाया, क्यों पल में तरु मुरझाया है।।
सर्दी-गर्मी-वर्षा में था जो हर पंछी का सुदृढ़ आश्वासन।
आज लगता है सुना-सुना जहाँ और सुना मन का हर कानन।
अनचाहा क्यों कालदिवस बन होली का दिन आया है।।
निज श्रमबूंदों से जिसने गण के हर पौधे को सींचा है।
ना भेद था छोटे-बड़े का तब ही खिल रहा संघ बगीचा है।
समता ममता वत्सलता ने हर पुष्प को सहलाया है।।
तीन-तीन गुरुओं की सेवा शासनमाता एक उदाहरण है।
गणभक्ति गुरुभक्ति समर्पण शासन माँ का विलक्षण है।
गुणरत्नों की आकर माँ के गुणों का पार न पाया है।।
व्यक्तित्व विराट था मैया कभी ना वाणी का विषय बना पाये।
ऊर्जस्वल आभा नेतृत्व कौशल युग-युग भूला ना जाये।
शासनमाता पद ने गण का गौरव शिखरों चढ़ाया है।।
लय: चाँद सी महबूबा...