शासनश्री साध्वी जयप्रभा जी के प्रति आध्यात्मिक उद्गार

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साध्वी डॉ. लावण्ययशा

शासनश्री साध्वी जयप्रभा जी के प्रति आध्यात्मिक उद्गार

अर्हम्

साध्वी डॉ. लावण्ययशा

शासनश्री जयप्रभा जी शासन शान बढ़ाई।
संयम की उजली चादर को देते सौ सौ बधाई।
जय हे जय हे जयप्रभा, शासनश्री की बढ़े प्रभा॥

हुलासमल की लाल लाडली विद्या माँ मन भाई।
गिरिगढ़ में जन्मी तुम देखो गिरिगढ़ दीक्षा पाई।
गुरु तुलसी से संयम पाकर, जागी नव पुण्याई॥

विनय समर्पण श्रद्धा तुम में गुरु निष्ठा आज्ञाकारी।
बड़ भगिनी से संथारा पा हद हिम्मत हिकारी।
वीर वृत्ति से अनशन लेकर, चोरड़िया कुल चमकाई॥

सब जीवों से मैत्री रखती प्रमोद भाव गुणकारी।
पापभीरुता ॠजुता मृदुता जीवन में सुखकारी।
कला कौशल में कुशल बनी, और सेवाभाव मनहारी॥

भिक्षु शासन संघ सुनहला गुरुओं की कृपा है पाई।
महाश्रमण ने शासनश्री का अलंकरण दिया वरदाई।
सूरज लावण्य नैतिक सह, मंजु गीत गा हर्षाई॥

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