साध्वीप्रमुखा मनोनयन के अवसर पर मन के उद्गार

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साध्वी परमयशा, साध्वी विनम्रयशाजी

साध्वीप्रमुखा मनोनयन के अवसर पर मन के उद्गार

चंदेरी की राजदुलारी मुख्य नियोजिका कहलाएं
महातपस्वी महाश्रमण साध्वी प्रमुखा पद बगसाएं
वंदे गुरुवरम् वंदे शासनम्

मोदी कुल में जन्म लिया परिवार ने दिया वरदान
दड़े पर है घर सुहाना भरती रहो सदा उड़ान
मात तात भ्राता भगिनी के संस्कारों से हो महान
मंगल गाएं हर्ष मनाएं भिक्षु शासन हरसाएं।।

नवमासन से पायी दीक्षा मिला वात्सल्य अनपार
दसमासन की शासना में शिक्षा समीक्षा पाया सार
एकदशवें अनुशास्ता ने बरसायी है अमृत धार
गुरु इंगित आकार से तेरापंथ का गौरव गाएं।।

शासनमाता महाश्रमणी की आराधी दृष्टि पावन
अमूल्य रत्नों को बटोर झोली भरली मनभावन
सबको चित्त समाधि का उपहार मिले दो आश्वासन
सौम्य शासना बने शुभंकर स्वस्तिक अक्षत है लाएं।।

विनम्रता कैसी हो सीखें नव नियुक्त प्रमुखाजी से
सहिष्णुता कैसी हो सीखंे नव नियुक्त प्रमुखाजी से
समर्पण कैसा हो सीखें विश्रुत विभा प्रमुखाश्री से
ज्ञानी ध्यानी स्वाध्यायी शासन सुमेरू बन जाएं।।

समणश्रेणी में पहली नियोजिका के पद से गौरवान्वित
विदेशों में की पहली यात्रा जिनशासन या हर्षान्वित
मुख्य नियोजिका पद से तेरापंथ शासन रोमांचित
नवम् साध्वी प्रमुखाश्री से संघ समूचा महकाएं ।।

नए-नए इतिहास रचाओ शुभ भविष्य हो शासन का
स्वागत अभिनंदन की बेला उत्सव है वर्धापन का
साध्वीगण को खुशियां बांटो स्वर्णिम दिन सम्मान का
आश हो विश्वास हो अब नव उन्मेष दिखलाएं।।