जीवन की सच्ची पाठशाला है ज्ञानशाला

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जीवन की सच्ची पाठशाला है ज्ञानशाला

कांकरोली
साध्वी मंजुयशा जी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा की ओर से ज्ञानशाला दिवस मनाया गया। कार्यक्रम से पूर्व ज्ञानशाला के बच्चों की रैली निकाली गई। रैली नया बाजार के तेरापंथ भवन से प्रारंभ होकर प्रज्ञा विहार तेरापंथ भवन में पहुँची तथा बाल परिषद में परिणत हो गई। कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वीश्री जी के नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुआ। ज्ञानशाला के बच्चों ने गीत का संगान किया। तेरापंथ सभा के मंत्री विनोद चोरड़िया ने सभा की ओर से अतिथियों का स्वागत किया। साध्वीश्री जी ने कहा कि आज हम ज्ञानशाला दिवस मना रहे हैं। ज्ञानशाला एक ऐसा मंदिर है जिसमें ज्ञान तो दिया जाता ही है इसके साथ बच्चों को अच्छे संस्कार भी दिए जाते हैं। आज जरूरत है बालकों को प्रारंभ से ही सुसंस्कार के बीज वपन हो।
इस अवसर पर साध्वी चिन्मयप्रभा जी ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिका वर्ग ने गीत प्रस्तुत किया। बच्चों द्वारा लघु नाटिका एवं कव्वाली भी प्रस्तुत की गई। तेरापंथ सभा द्वारा ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं के श्रम एवं समय की प्रशंसा करते हुए सभी को सम्मानित किया गया। पच्चीस बोल के कुछ बोल छोटे से बच्चे युवान तलेसरा, हीरल तलेसरा ने भक्तामर को शुद्ध उच्चारण से तथा माही पगारिया ने प्रतिक्रमण बड़े व्यवस्थित रूप से सुनाया।
तेरापंथ सभा की ओर से शिशु संस्कार बोध की परीक्षा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों तथा ऑनलाइन पर चलने वाले प्रतिक्रमण भक्तामर आदि की प्रश्नोत्तरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सभी बच्चों को सभा द्वारा पुरस्कृत किया गया। ज्ञानशाला दिवस के अन्य प्रायोजक पारसमल का पूर्ण सहयोग रहा। कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका मंजु दक, पारसमल पितलिया, विनोद बड़ाला, सहमंत्री सूरत जैन, महेंद्र, महिला मंडल अध्यक्ष इंदिरा पगारिया आदि कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन बाबूलाल ने किया।