मंगलभावना समारोह के आयोजन

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मंगलभावना समारोह के आयोजन

बैंगलोर
तेरापंथ सभा भवन, गांधीनगर में मुनि अर्हत कुमार जी के सान्निध्य में ऐतिहासिक सफलतम चातुर्मास के आखरी दिन मंगलभावना समारोह का आयोजन हुआ। मुनि अर्हत कुमार जी ने कहा कि भगवान महावीर ने एक सूत्र दियाµचरैवेति-चरैवेति। भारतीय संस्कृति में अभिनंदन और विदाई दोनों का बड़ा महत्त्व रहा है, जिसका आगमन होता है उसकी एक दिन विदाई भी होती है। साधु और पानी दोनों को चलते रहना चाहिए, क्योंकि बहता पानी निर्मल होता है और गतिमान साधु का जीवन उज्ज्वल होता है। आपको हमें विदाई नहीं देनी है, विदाई देनी है अपने अवगुणों को अपनी बुराइयों को।
मुनि भरत कुमार जी ने कहा कि बैंगलोर का चातुर्मास बना मुनिश्री के श्रम से खास, हमें है विश्वास बैंगलुरु में निरंतर महकेगी धर्म-ध्यान की सुवास। बाल संत मुनि जयदीप कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त किए। सांसद पीसी मोहन ने कहा कि मुनिश्री के दर्शन कर कृतार्थ हुआ। जैन धर्म से मैं हमेशा प्रभावित हूँ। मागड़ी विधायक ए0 मंजूनाथ और पूर्व पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने मुनिश्री से प्रेरणा प्राप्त की और अपने विचार व्यक्त किए। प्रेक्षा संगीत सुधा, प्रज्ञा संगीत सुधा एवं ज्ञानशाला ने प्रस्तुति दी। महासभा से प्रकाशचंद लोढ़ा, तेरापंथ सभा अध्यक्ष कमल सिंह दुगड़, महिला मंडल अध्यक्षा स्वर्ण माला पोखरना, तेयुप अध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा, टीपीएफ अध्यक्ष हितेश गीड़िया सहित अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य तथा श्रावक समाज ने मुनिश्री के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए मंगलभावना व्यक्त की। संचालन मंत्री गौतम मांडोत ने किया।