तीन धाराओं का आध्यात्मिक मिलन

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तीन धाराओं का आध्यात्मिक मिलन

एम0के0बी0 नगर, चेन्नई।
एम0के0बी0 नगर, चेन्नई जैन स्थानक में साध्वी डॉ0 मंगलप्रज्ञा जी, साध्वी सिद्धिसुधा जी एवं साध्वी जिनाशा जी आदि 10 साध्वियों का त्रिवेणी संगम जैसा मधुर आध्यात्मिक मिलन हुआ। इस अवसर पर साध्वी डॉ0 मंगलप्रज्ञा जी ने कहा कि महावीर ने कहा साधना के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सूत्र है-साधक अपनी आत्मा को पवित्र और निर्मल बनाए। जहाँ पवित्रता और निर्मलता होती है, वहीं प्रसन्नता का साम्राज्य होता है। साध्वीश्री जी ने कहा कि जैनशासन की प्रतिष्ठा के लिए संपूर्ण जैन समाज को जागरूक रहना होगा। समाज में विघटन की स्थितियों पर चिंतन करना होगा।
साध्वी सिद्धिसुधा जी ने कहा कि संत मिलन प्रेम का संदेश देता है। आज त्रिवेणी संगम, विचारों का विमर्श, सद्भावनाओं की सुगंध, हर व्यक्ति को आनंद प्रदान कर रहा है।
साध्वीश्री जी ने कहा कि जहाँ एकता, प्रेम का प्रवाह होता है वहाँ सभी आनंद की गंगा में नहाते हैं। हम सभी एक ही पंथ के राही हैं। संपूर्ण समाज इस स्नेह मिलन से नई प्रेरणा लें, प्रसन्नता की अनुभूति करें।
साध्वी सुविधिश्री जी एवं साध्वी सुमतिश्री जी ने गीत प्रस्तुत किया। साध्वीवृंद ने गीत का सामूहिक संगान किया। मूर्तिपूजक संप्रदाय से साध्वी जिनाशाश्री जी ने कहा कि जिनशासन की गरिमा बढ़ाएँ और धर्म की आराधना करके प्रवृत्ति को सुधारें, आज हमें अद्भुत त्योहार मनाने का अवसर मिला है। कार्यक्रम का संचालन सज्जनराज सुराणा ने किया।