अध्यात्म की मौलिकता त्रैकालिक है

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अध्यात्म की मौलिकता त्रैकालिक है

मैसूर।
साध्वी उज्ज्वलप्रभा जी ने तेरापंथ भवन में अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि आधुनिक विकास मात्र शरीर का ढाँचा माना जाता, जब तक उसमें अध्यात्म का प्राण संचार नहीं होता, तब तक वह जीवन समरस नहीं बनता, इसलिए अध्यात्म की मूल्यवत्ता त्रैकालिक सत्य के साथ जुड़ी हुई है, इसकी प्रेरणा के लिए साधु-साध्वियों का आगमन होता, क्योंकि साधु-साध्वियाँ अध्यात्म का मूर्त रूप होते हैं।
साध्वी अनुप्रेक्षाश्री जी ने कहा कि शुभ भावधारा में रहने वाला व्यक्ति अपने जीवन को धन्य बनाता है। साध्वी प्रबोधयशा जी ने गीत का संगान किया। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष प्रकाश दक ने साध्वियों का स्वागत किया। ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर, दूसरे दिन का प्रवास महेंद्र नाहर के निवास स्थान पर हुआ। रात्रि में धम्म जागरणा का आयोजन भी रखा गया।