संतों का भव्य स्वागत एवं ध्वज हस्तांतरण कार्यक्रम

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संतों का भव्य स्वागत एवं ध्वज हस्तांतरण कार्यक्रम

बारीपदा।
मुनि जिनेश कुमार जी के प्रथम बार बारीपदा शहर में पधारने पर स्थानीय तेरापंथ जैन परिवारों द्वारा दूर तक अगवानी कर भावभीना स्वागत किया। इस अवसर पर नगरपालिका के चेयरमैन कृष्णानंद महांति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर कटक तेरापंथी सभा द्वारा कोलकाता तेरापंथी सभा को सेवा का दायित्व ध्वज हस्तांतरित कर प्रदान किया गया। इस अवसर पर कटक, कोलकाता, कोलाघाट, बालेश्वर, बेतनटी आदि क्षेत्रों से अच्छी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे। मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा कि धर्म का मूल सूत्र है-पाप से बचो। पाप से बचने का उपाय है-अध्यात्म। अध्यात्म से तात्पर्य है-आत्मा में रहना। आत्मा में रहने का पहला सूत्र है-सद्भावना। हमारे भाव अच्छे रहें।
मुनिश्री ने आगे कहा कि नैतिकता सार्वभौम तत्त्व है। नीति न्याय के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति सुख और आनंद का अनुभव करता है। मुख्य अतिथि कृष्णानंद माहंति ने बारीपदा में संतों का स्वागत करते हुए कहा कि संत हमें हमारे कर्तव्य के बारे में सचेतन करते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ बाल मुनि कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुआ। बारीपदा तेममं एवं बेटियों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। श्रेयांस एवं प्रिया दुगड़ ने लघु परिसंवाद प्रस्तुत किया। अनूप दुगड़ ने स्वागत भाषण दिया। तेरापंथी सभा, कटक के अध्यक्ष मोहनलाल सिंघी, तेरापंथी सभा, कोलकाता के अध्यक्ष अजय भंसाली, आंचलिक प्रभारी तेजकरण बोथरा सहित अनेक पदाधिकारीगणों ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन कटक तेरापंथी सभा के मंत्री चैनरूप चोरड़िया ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद जी ने किया। अतिथियों का सम्मान किया गया।