‘कैसी हो हमारी वाणी’ कार्यशाला का आयोजन

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‘कैसी हो हमारी वाणी’ कार्यशाला का आयोजन

राजमुंद्री।
बोथरा हाउस में मुनि दीप कुमार जी के सान्निध्य में ‘कैसी हो हमारी वाणी’ कार्यशाला का आयोजन तेरापंथी सभा, राजमुंद्री द्वारा किया गया। मुनि दीप कुमार जी ने कहा कि जीवन को कलापूर्ण बनाने के लिए बोलने की कला का विकास करना जरूरी है। वाणी का सदुपयोग भी किया जा सकता है, दुरुपयोग भी। इससे समस्या भी पैदा की जा सकती है, समाधान भी किया जा सकता है। भाषा व्यक्तित्व का आइना है। वाणी से पता चल जाता है कि व्यक्ति कैसा है।
मुनिश्री ने आगे कहा कि हमारी वाणी इष्ट, मिष्ठ, शिष्ट हो तो व्यक्ति विशिष्ट बनता है। मितभाषी बनें, मधुरभाषी बनें, सत्यभाषी बनें और समीक्ष्यभाषी बनें। वाणी को बाण नहीं, वीणा बनाएँ। मुनि काव्य कुमार जी ने कहा कि पारिवारिक जीवन में संबंधों की मधुरता के लिए वाणी संयम बहुत जरूरी है। वाणी संयम होगी तो परिवार स्वर्ग के समान बनेगा, नहीं तो नरक तुल्य बन जाएगा।