चुनौतियों से कतराने का प्रयास न करें

संस्थाएं

चुनौतियों से कतराने का प्रयास न करें

चंडीगढ़।
चुनौतियों से निरंतर जूझते रहने का नाम ही जीवन है। जिन्हें सदा संरक्षण मिलता रहा वे स्वतंत्र रूप से बेहतरीन कार्य निष्पादन में अक्षम रहे। ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, कला, साहित्य, अध्यात्म, समाजकार्य आदि क्षेत्रों में जिन्होंने बुलंदियाँ हासिल की, उन्होंने कुदाली पकड़कर अपने रास्ते स्वयं तैयार किए। लक्ष्य प्राप्ति की उधेड़बुन में एक-दर-एक चुनौतियों से निबटने की प्रक्रिया में उन्हें निजी स्वार्थ साधने की सुध न रही। यह विचार मनीषी संत मुनि विनय कुमार जी ‘आलोक’ ने अणुव्रत भवन, तुलसी सभागार में व्यक्त किए। मुनिश्री ने आगे कहा कि कर्मवीर चुनौतियों से कतराना या बचने का प्रयास नहीं करता। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह जानता है कि इन्हीं सीढ़ियों के माध्यम से मंजिल तक पहुँचा जा सकता है। मुनिश्री ने कहा कि स्वयं को सही समझने के अहंकार से बचें।