अनावश्यक ना बोलना भी मौन की उत्तम साधना

संस्थाएं

अनावश्यक ना बोलना भी मौन की उत्तम साधना

बालोतरा।
अभातेममं के निर्देशानुसार तेममं के तत्त्वावधान में न्यू तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वी सत्यप्रभा जी और शासनश्री साध्वी कमलप्रभा जी के सान्निध्य में ‘द पावर आॅफ साइलेंस’ कार्यशाला आयोजित की गई। मंत्री संगीता बोथरा ने बताया कि सर्वप्रथम नमस्कार महामंत्र के मंगलाचरण से कार्यशाला की शुरुआत हुई। महिला मंडल अध्यक्ष निर्मला देवी संकलेचा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। शासनश्री साध्वी सत्यप्रभा जी ने कहा कि जितने कम शब्दों में हमारा काम हो सके उतने कम शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। हमें बहुत बोलना नहीं चाहिए। हमारी वाणी में माधुर्य और भाषा ऊँची होनी चाहिए। कई उदाहरणों के माध्यम से कम बोलना और ज्यादा बोलने का महत्त्व बताया।
शासनश्री साध्वी कमलप्रभा जी ने कहा कि अनेक प्रयोग जैन दर्शन में बताए गए हैं किंतु उसमें सबसे सरल उपक्रम हैµमौन। मौन ऐसा उपक्रम है जिसमें खाना-पीना सब कुछ चलता है, किंतु फिर भी सबके लिए मौन रहना सरल नहीं है। हमें अंतध्र्यान से मौन करना चाहिए।
साध्वी शताब्दी प्रभा जी ने कहा कि मौन एक अच्छी साधना है जहाँ आवश्यक हो वही बोलें। हमें जरूरत से ज्यादा नहीं बोलना चाहिए। अनावश्यक ना बोलना भी मौन है। अभातेममं सदस्य व मारवाड़ क्षेत्र प्रभारी सारिका बागरेचा ने मौन पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर परामर्शक लुणीदेवी गोलेछा, पीपी देवी ओस्तवाल, नारायणी देवी छाजेड़, उपाध्यक्ष रानी बाफना, कोषाध्यक्ष उर्मिला सालेचा, सहमंत्री इंदु भंसाली, रेखा बालड़, प्रचार-प्रसार मंत्री पुष्पा सालेचा, निवर्तमान अध्यक्ष अयोध्या देवी ओस्तवाल, पूर्व परामर्शक कमलादेवी ओस्तवाल, पूर्व अध्यक्ष सहित लगभग 100 बहनें उपस्थित थीं। इस अवसर पर घाति-अघाति प्रतियोगिता में प्रथम मुस्कान वेद मेहता, द्वितीय पिंकी सालेचा, तृतीय ममता ओस्तवाल को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन व आभार ज्ञापन मंत्री संगीता बोथरा ने किया।