अध्यात्म की विरल विभूति आचार्यश्री महाप्रज्ञ

संस्थाएं

अध्यात्म की विरल विभूति आचार्यश्री महाप्रज्ञ

जयपुर, श्यामनगर।
बहुश्रुत शासन गौरव साध्वी कनकश्री जी के सान्निध्य में आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 14वाँ महाप्रयाण दिवस श्यामनगर स्थित भिक्षु साधना केंद्र, जयपुर के विशाल प्रांगण में मनाया गया। प्रारंभ में ‘¬ श्री महाप्रज्ञ गुरवे नमः’ का सामूहिक 108 मंत्रोच्चारण हुआ। नेहा, निधि बोथरा ने मंगलाचरण किया। शासन गौरव साध्वीश्रीजी ने कहा कि वर्तमान युग के महान दार्शनिक संतों में जिनका नाम अत्यंत गौरव और आदर के साथ लिया जाता है, वे हैं प्रेक्षाध्यान पुरस्कर्ता आचार्य महाप्रज्ञ। योग्य शिष्य गुरु को विश्वप्रतिष्ठित कर देता है। तेरापंथ, अणुव्रत और आचार्य तुलसी को विश्वप्रतिष्ठित करने में श्री महाप्रज्ञ की भूमिका अनन्य और अद्भुत रही है। शताब्दियों बाद विश्व क्षितिज पर आचार्यश्री तुलसी और आचार्यश्री महाप्रज्ञ जैसी आध्यात्मिक विभूतियाँ गुरु शिष्य के रूप मे प्रकट होती हैं। आचार्यश्री महाप्रज्ञ श्रुतधर थे, ज्ञान के अपार भंडार थे। शोध विद्वानों के लिए विश्वकोश थे। साध्वीश्रीजी ने परम गुरु की परम पावनी सन्निधि में जिए गए दुर्लभ क्षणों के मधुर संस्मरण सुनाते हुए परिषद् को भाव-विभोर बना दिया।
सी-स्कीम महिला मंडल की अध्यक्षा नीरू पुगलिया, टीपीएफ के अध्यक्ष संदीप जैन, भिक्षु साधना केंद्र समिति के अध्यक्ष टमकोर निवासी नवरतनमल नखत, संदीप भंडारी आदि ने अपनी श्रद्धामयी अभिव्यक्ति दी। सुशीला नखत, सुशीला पुगलिया, सुशीला चोपड़ा, प्रेम दुगड़, तारा दुगड़, कनक दुधोड़िया और रुचि बैंगानी ने गद्य-पद्य मिश्रित नई विधा में ‘ महाप्रज्ञ जीवन दर्शन’ प्रस्तुत किया। साध्वीवृंद ने गीत की प्रस्तुति दी। समय प्रबंधन का ध्यान रखते हुए प्रवक्ता साध्वियों व श्रावकों ने प्रज्ञा पुरुष के चरणों में मौन विनयांजलि समर्पित की। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी सीमितप्रभा जी ने किया।