द पावर ऑफ डिसिप्लीन कार्यशाला

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द पावर ऑफ डिसिप्लीन कार्यशाला

अमराईवाडी।
अभातेममं के निर्देशन में तेममं द्वारा शासनश्री साध्वी सरस्वती जी के सान्निध्य में शिल्पशाला का आयोजन किया गया। जिसका विषय था-‘द पावर ऑफ डिसिप्लीन’। कार्यशाला की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के द्वारा साध्वीश्री जी ने की। कन्या मंडल की बहनों के द्वारा मंगलाचरण किया गया। मंडल की अध्यक्षा संगीता सिंघवी ने साध्वीश्री जी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए सभी का स्वागत किया। शासनश्री साध्वी सरस्वती जी ने कहा कि जीवन में अनुशासन का बड़ा महत्त्व है और जो व्यक्ति अनुशासित होता है वही सफलता के शिखर पर आगे बढ़ सकता है। जो व्यक्ति स्वयं अनुशासित होता है, वही व्यक्ति दूसरों पर अनुशासन कर सकता है। जब अपना अनुशासन होगा तो ही बड़ों से भी वात्सल्य मिलता है। इसलिए अनुशासन को जीवन में बनाए रखें, हर परिस्थिति में अनुशासित रहें।
साध्वी संवेगप्रभा जी ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ का प्राण है-अनुशासन। आचार्यों का एक संबोधन है-अनुशासन। तेरापंथ धर्मसंघ की डोर एक आचार्य के हाथ में है और वह डोर है-अनुशासन की। उसी डोर के अनुशासन के आधार पर पूरा धर्मसंघ चल रहा है। साध्वी तरुणप्रभा जी ने कहा कि अनुशासन क्या है? अनुशासन है बड़ा, जीवन का आधार। जीवन की अंधियारी राहों में प्रकाश पुंज है-अनुशासन। जिस व्यक्ति का स्वयं के प्रति अनुशासन होता है वह सफल और खुशहाल जीवन जी सकता है। वही व्यक्ति विकास कर पाता है। तेरापंथ धर्मसंघ अनुशासित मर्यादित एवं प्राणवान संघ है। इस संघ से हम प्रेरणा लें और अपने जीवन को सफल बनाएँ।
उपासिका मंजू गेलड़ा एवं अहमदाबाद सभा की सहमंत्री लाडदेवी बाफना ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला का संचालन मंत्री लक्ष्मी सिसोदिया ने किया एवं आभार ज्ञापन उपाध्यक्ष नीरू सिंघवी ने किया। कन्या मंडल और महिला मंडल की उपस्थिति रही।