अक्षय तृतीया के विविध आयोजन

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अक्षय तृतीया के विविध आयोजन

अमरनगर, जोधपुर
अक्षय तृतीया महोत्सव का आयोजन तेरापंथ भवन, अमरनगर में किया गया। कार्यक्रम साध्वी प्रमोदश्री जी के सान्निध्य में आयोजित हुआ। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ ने शुद्ध दान को ग्रहण कर अपने 13 महीने के लगातार तपस्या का अक्षय तृतीया के दिन ही पारणा किया। उसी के उपलक्ष्य में जैन वर्षीतप आराधक 13 माह तक वर्षीतप की साधना की जाती है। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल व कन्या मंडल, सरदारपुरा के गीत संगान से हुआ। तेरापंथ सभा, सरदारपुरा के अध्यक्ष सुरेश जीरावला ने स्वागत उद्बोधन दिया। साध्वी विद्युतप्रभा जी, तेरापंथ महिला मंडल मंत्री चंद्रा जीरावला, भंवरलाल भंसाली, मुकेश मेहता ने वक्तव्य द्वारा सभी तपस्वियों का अभिनंदन किया। साध्वीवृंद व तेयुप द्वारा गीतिका के संगान द्वारा तपस्वी साधु-साध्वियों व श्रावकों का अभिनंदन किया गया।
साध्वी कुंदनप्रभा जी ने तप का महत्त्व बताया। अपना प्रथम वर्षीतप कर रहे साध्वी मध्यस्थप्रभा जी ने बताया कि जीवन में किसी भी कार्य को करने के लिए ‘संकल्प करना, अनुकूल वातावरण मिलना और संघर्षों में जड़ें मजबूत रखना’ जरूरी है। साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी के मध्यस्थप्रभा जी के प्रथम वर्षीतप के उपलक्ष्य में भेजे गए संदेश का वाचन महावीर ढेलड़िया ने किया। साध्वी प्रांजलप्रभा जी ने कहा कि भगवान देव ने स्वस्थ समाज की स्थापना की। भगवान में अपने विवेक से यह जाना कि हर समस्या की जड़ अज्ञान है। इसी को ध्यान में रखकर जनमानस को असि, मसि, कृषि का ज्ञान दिया। श्रावक-श्राविका समाज में पन्नालाल कागोत ने अपना छठा, तुलसी देवी ने अपना छठा, लीला देवी संचेती ने अपना चौथा, बाबूबाई ने अपना 13वाँ एवं ज्योति ने अपना प्रथम वर्षीतप इक्षुरस ग्रहण कर अपना पारणा किया।
कार्यक्रम के अंत में अपना दूसरा वर्षीतप पूर्ण करने वाले मुनि जयकुमार जी ने गीतिका एवं मंगलपाठ द्वारा कार्यक्रम का समापन किया। मुनि मुदित कुमार जी ने एकाशन के वर्षीतप को पूर्ण किया। कार्यक्रम में बालोतरा, टापरा, कोरणा आदि स्थानों से श्रावक समाज की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन सभा उपाध्यक्ष विनय तातेड़ ने किया। स तप अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन तेरापंथ भवन में साध्वी प्रमोदश्री जी के सान्निध्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के संयोजक सभा, सरदारपुरा अध्यक्ष सुरेश जीरावला ने बताया कि यह कार्यक्रम जोधपुर शहर में विराजित मुनि जय कुमार जी के दूसरे वर्षीतप, साध्वी विजयप्रभा जी के 12वें वर्षीतप और साध्वी मध्यस्थप्रभा जी के प्रथम वर्षीतप की अनुमोदना स्वरूप आयोजित किया गया है।
अनुमोदना कार्यक्रम में मंगलाचरण साध्वी पार्श्वप्रभा जी द्वारा गीतिका द्वारा हुआ। साध्वीवृंद ने गीत का संगान किया। साध्वी रुचिप्रभा जी ने साध्वी आगमप्रभा जी द्वारा प्रेषित गीत का संगान किया। साध्वी गौतमप्रभा जी ने स्वरचित गीत का संगान किया। साध्वी प्रमोदश्री जी ने कहा कि तपस्या करना दुष्कर है, कठिन साधना है। साध्वी विजयप्रभा जी ने और साध्वी मध्यस्थप्रभा जी ने वर्षीतप कर साहस का परिचय दिया है। आप दोनों ऐसे ही आगे बढ़ते रहो, आत्म-विकास करती रहो, यही मंगलकामना। इस अवसर पर तेयुप, सरदारपुरा, महिला मंडल व मोनिका छाजेड़, स्नेहा छाजेड़ ने तप गीत से वर्षीतप आराधक की अनुमोदना की।