अनुशासन कार्यशाला आयोजित

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अनुशासन कार्यशाला आयोजित

ईरोड।
तेममं द्वारा स्थानीय तेरापंथ भवन में आयोजित अनुशासन कार्यशाला का आयोजन साध्वी डॉ0 गवेषणाश्री जी के सान्निध्य में हुआ। साध्वी डॉ0 गवेषणाश्री जी ने कहा कि विकास के अनेक मापदंड हैं, उसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है-अनुशासन। अनुशासन शरीर के रीढ़ के समान है। यह पाँच अक्षरीय गाड़ी है, दूसरों के कहे अनुसार चलना और अपने मन से कुछ नहीं करना ही अनुशासन है। अनुशासनहीन जीवन विकास का सबसे बड़ा बाधक तत्त्व है।
साध्वी मयंकप्रभाजी ने कहा कि अनुशासन का अर्थ है अपने अस्तित्व का समर्पण। जहाँ समर्पण है वह विकास है। अति स्वतंत्रता स्वच्छदंता को जन्म देता है, वर्तमान में कोई किसी के अनुशासन में रहना नहीं चाहता है। कोई एक-दूसरे को सहन करना नहीं चाहता है। साध्वी दक्षप्रभा जी ने मधुर गीत की प्रस्तुति दी। साध्वी मेरुप्रभा जी ने कार्यक्रम का संचालन किया। महिला मंडल की बहनों द्वारा मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महिला मंडल उपाध्यक्ष मंजु बोथरा द्वारा स्वागत भाषण एवं महिला मंडल मंत्री पिंकी वैदमुथा द्वारा आभार ज्ञापन व्यक्त किया।