फौलादी संकल्प के धनी थे आचार्य भिक्षु

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फौलादी संकल्प के धनी थे आचार्य भिक्षु

पीतमपुरा, दिल्ली,
आचार्य भिक्षु के 298वें जन्म दिवस पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने कहा कि आचार्य भिक्षु का जन्म सिंह स्वप्न से हुआ था। अतः माँ दीपा जी ने बड़े-बड़े सपने संजोए थे। मेरा बेटा राजा बनेगा। मैं राजमाता बनूँगी। घर में अतुल संपदा का साम्राज्य होगा। एक दिन स्थानकवासी संप्रदाय के आचार्य रघुनाथ दीपां को समझाने आए। तुम भिक्षु को दीक्षा की अनुमति दे दो। माँ ने कहाµमैं इसको दीक्षा नहीं दूँगी। मेरे स्वप्न के अनुसार यह भविष्य में राजा बनेगा। आचार्यश्री ने कहा कि तेरा बेटा दीक्षा लेकर सिंह की तरह गूंजेगा। तब आश्वस्त होकर माँ ने अनुमति दे दी। शासनश्री साध्वी सुव्रतांजी ने कहा कि आचार्य भिक्षु फौलादी संकल्प के धनी थे। उनको शल्य साधना और धर्म क्रांति से विचलित करने के लिए अनेकों भूचाल और तूफान आए पर वे हिमालय की तरह अचल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल द्वारा समुच्चारित गीत से हुआ। जैन विश्व भारती के पूर्व उपाध्यक्ष अरुण संचेती, तेरापंथी महासभा को उपाध्यक्ष संजय खटेड़, पीतमपुरा तेरापंथ सभा उपाध्यक्ष मनफूल बाई ने भिक्षु के संदर्भ में विचार व्यक्त किए। साध्वी कार्तिकप्रभा जी, साध्वी चिंतनप्रभा जी ने मधुर स्वर से भिक्षु गुणोत्कीर्तन किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी चिंतनप्रभा जी ने किया।