चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के आयोजन

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चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के आयोजन

टापरा (जसोल)
मुनि जय कुमार जी ने कहा कि हम चंद्रमा की तरह निर्मल, सूर्य की तरह तेजस्वी और सागर की तरह गंभीर बनें, यही मनुष्य का आध्यात्मिक विकास होगा। ऐसे आध्यात्मिक विकास से परिपूर्ण मनुष्य स्वयं का कल्याण तो करेंगे ही और साथ में राष्ट्र का कल्याण भी कर पाएँगे। आज का युग भौतिक विकास का युग है। मनुष्य अपना शैक्षणिक और आर्थिक विकास कर रहा है, लेकिन उसका नैतिक विकास नहीं हो रहा है। मनुष्य के भौतिक विकास के साथ नैतिक काटर आध्यात्मिक विकास होगा, तभी यह विकास परिपूर्ण कहलाएगा।
मुनि जय कुमार जी के दीक्षा के करीब 30 साल बाद पहली बार उनका चातुर्मास प्रवास जन्म भूमि में हो रहा है। चातुर्मास प्रवेश के लिए तीनों संतों ने असाड़ा गाँव से विहार किया। टापरा कस्बे के बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संतों की अगवानी की। चातुर्मास प्रवेश के बाद मुनि जय कुमार जी ने देश भर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
मुनि जय कुमार जी की माता कमलादेवी ने अपनी भावनाएँ व्यक्त की। तेरापंथ सभा, टापरा के अध्यक्ष कांतिलाल गेलड़ा ने भी संतों का भावभरा स्वागत किया। पचपदरा विधायक मदन प्रजापत, सिवाना के पूर्व विधायक गोपाराम मेघवाल ओर टापरा सरपंच गोपाल सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग संतों के चातुर्मास प्रवेश कार्यक्रम में उपस्थित हुए। अंत में सुरेश गोठी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संदीप संखलेचा ने किया।