30वें विकास महोत्सव पर

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डॉ. साध्वी परमयशा

30वें विकास महोत्सव पर

युगप्रधान ने युगधारा को दिए नए अवदान
प्रभु को शीष झुकाएं, नाव को पार लगाएं।।
कुंकुम के चरणों से खटेड़ कुल में आएं
राजरूपजी दादाजी लाड खूब लडाएं
झूमर वदना नंदन तुलसी-चंदेरी सम्मान।।
अणुव्रत नैतिकता की अलख जगाएं
प्रेक्षा की छांह तले सपने सजाएं
जीवन का विज्ञान सुनहरा-शिक्षा का अभियान।।
जैन विश्व भारती मुलकों में छाएं
समण श्रेणी देश विदेशों पहचान बनाएं
पा0 शि0 संस्था की फुलवारी-अमल धवल अरमान।।
आगम के संपादन से कीर्तिमान रचाया
साहित्य अनुशीलन से सूरज उगाया
प्रचन कौशल-अद्भुत अविचल-उतरे पुण्य निधान।।
जब तक नभ में रवि शशि गौरव गाएं
ऊर्जा पुरूष का हम सब ध्यान लगाएं
विकास-महोत्सव की बेला में-‘परमयशा’ संगान।।
(लय: स्वर्ग से सुंदर)