ज्ञानशाला सद्संस्कारों के जागरण की अद्भुत शाला है

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ज्ञानशाला सद्संस्कारों के जागरण की अद्भुत शाला है

उधना
ज्ञानशाला के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि उदितकुमारजी के सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस का भव्य रूप में आयोजन हुआ, जिसमें पांडेसरा, लिंबायत, सचिन और उधना की ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुनि उदितकुमारजी ने कहा- ‘ज्ञानशाला सद्संस्कारों के जागरण की अद्भुत शाला है। गुरुदेव श्री तुलसी ने समाज को ज्ञानशाला के रूप में एक महान अवदान प्रदान किया है। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का ज्ञानशाला को विशेष आशीर्वाद प्राप्त है, तभी हम देखते हैं कि उनकी सन्निधि में प्रायः क्षेत्रों में ज्ञानशालाओं की प्रस्तुतियां होती रहती है। 62 ज्ञानशालाओं से शुरू हुआ यह सफर आज 550 से अधिक ज्ञानशालाओं तक पहुंच चुका है। पूरे देश में करीब 20000 ज्ञानार्थी लगभग 4000 प्रशिक्षिकों से ज्ञान व संस्कार प्राप्त कर रहे हैं। अभिभावकों का यह पुनीत धर्म है कि वे अपने बच्चों को ज्ञानशाला भेजें, जिससे उनके शुभ भविष्य का निर्माण हो सके।’
मुनि अनंतकुमारजी ने भी अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। उपस्थित ज्ञानशालाओं के ज्ञानार्थियों द्वारा उत्साहपूर्वक गीत, नाटिका आदि की प्रस्तुति दी गई। गुजरात आंचलिक संयोजक प्रवीण मेड़तवाल, सहसंयोजक भावेश हिरण, विशाल पारिख ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ज्ञानशाला उधना के संयोजक राजेश बाफना, उधना ज्ञानशाला की मुख्य प्रशिक्षिका उषा आंचलिया, क्षेत्रीय संयोजिका ज्योति मेडतवाल ने अपने प्रासंगिक विचार रखे। तेरापंथी सभा उधना के अध्यक्ष बसंतीलाल नाहर ने सभी ज्ञानशालाओं का स्वागत कर अपनी मंगलकामना व्यक्त की। कार्यक्रम से पूर्व ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों एवं प्रशिक्षिकाओं द्वारा आकर्षक रैली निकाली गई जो उधना के विभिन्न मार्गाे से गुजर कर तेरापंथ भवन पहुंची।