आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

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आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

कालू
तेरापंथ भवन में साध्वी उज्ज्वलरेखा जी के सान्निध्य में आचार्य भिक्षु निर्वाण दिवस मनाया गया। साध्वीश्री जी ने कहा कि आचार्यश्री भिक्षु ने सदैव समाधि जीवन जीया। अंतिम समय में भी वे समाधि में रहे। 77 वर्ष की आयु में वे एक युवा की तरह जीवन व्यतीत करते थे। तीन समय प्रवचन देना, खड़े-खड़े प्रतिक्रमण करना, ग्रंथों की रचना करना इत्यादि। 1860 सिरियारी प्रवास में जब उनका अंतिम चातुर्मास था तब उन्हें अवधि ज्ञान का आभास हुआ। अपने अंतिम समय में उन्होंने संथारा ग्रहण कर लिया और त्रयोदशी के दिन स्वर्गलोक वाशी हो गए।
कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी नम्रप्रभा जी द्वारा मंगलाचरण के साथ की गई। कल्पना सांड ने संचालन किया। सुदीर्घजीवी साध्वी बिदामाजी ने एक श्लोक के साथ हमें बताया कि भिक्षु स्वामी ने तेरापंथ की दुकान खोली है। रेनू बोथरा, मंत्री भतमल जी ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। जागृति भदानी, कन्या मंडल, महिला मंडल और साध्वी स्मितप्रभा जी ने गीतिका के द्वारा अपने भावों की प्रस्तुति दी। साध्वी अमृतप्रभा जी, साध्वी हेमप्रभा जी ने आचार्य भिक्षु के जीवन की कठिनाइयों से हमें परिचित करवाया। धर्मसभा में संघ गान का संगान हुआ। अंत में मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।