युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण द्वारा रचित गीत

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युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण द्वारा रचित गीत

विकास महोत्सव के उपलक्ष्य में

हम दृढ़ निश्चय कर पाएँ।
हम शिव संकल्प सजाएँ।
कठिनाई आने पर भी हम क्यों ज्यादा घबराएँ।।

विघ्नों से घबराकर जो जन कार्यारंभ नहीं करते हैं।
निम्न कोटि के वे नर होते, जीवित भी मरते हैं।।1।।

उत्साहित हो कठिन कार्य भी जो शुरू तो कर देते।
नहीं पूर्णता तक पहुँचाते वे मध्यम स्तर लेते।।2।।

विघ्नाहत हो-होकर भी जो प्रवर कार्य नहीं तजते हैं।
उत्तम स्तर के नर वे होते, लोग उन्हें भजते हैं।।3।।

गुरु तुलसी का पदारोह दिन आज विकास महोत्सव।
महाप्रज्ञ-अवदान शुभंकर, ‘महाश्रमण’ विनयोत्सव।।4।।

बढ़े मुंबई नगरी निशदिन, आध्यात्मिक उत्कर्ष दिशा में।
हो उत्थान भिक्षु-शासन का दिन में तथा निशा में।।5।।

लय: रे सुजना! भजत मुदा---