आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

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आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

सिरियारी
अतिशायी आभा के धनी, अनगिन प्रेरणाओं के पुरस्कर्ता, अदम्य इच्छा-शक्ति के स्वामी, प्रत्सत्मन्न मेधा के धारक, कई जन्मों के योगी जिनके सामने घेर विरोधी भी झुकते चले गए, जिन्होंने जीवन जीया तो ऐसा जीया कि लाखों-लाखों के जीने की वजह बन गए और मृत्यु वरी तो ऐसी वरी कि उनका मरण भी एक उत्सव बन गया। ऐसे थे आचार्यश्री भिक्षु। प्रत्येक सुदी तेरस को समधी स्थल में एक मेला-सा लग जाता है। देश-विदेश से हजारों भक्तगण समाधी दर्शन के लिए आते हैं। जैन-अजैन सभी इसके लिए उत्सुक रहते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पूरी रात चलने वाली भजन संध्या और उसमें भी मिलने वाला संतों का सान्निध्य। किंतु तेरस के एक दो दिन पहले से ही श्रद्धालुगण अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने लग जाते हैं। प्रख्यात गायक-गायिकाओं ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कमल सेठिया, निलेश बाफना, राहूल बालड़, अपेक्षा पामेचा, डाकलिया बंधु आदि अनेक कलाकारों ने कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज की। शासनश्री मुनि मणिलाल जी स्वामी ने गीत की प्रस्तुति दी। मुनि आकाश कुमार जी ने अपनी कवित्व शैली में जनता का मन मोहा। मुनि हितेंद्र कुमार जी ने उद्गार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन पन्नालाल पुगलिया ने किया।