पर्युषण महापर्व का शुभारंभ

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पर्युषण महापर्व का शुभारंभ

पीतमपुरा, दिल्ली।
खिलौनी देवी धर्मशाला में पीतमपुरा में पर्युषण महापर्व पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने कहा कि जैसे सब मंत्रों में नमस्कार महामंत्र सब तीर्थों में शत्रुंजय, सब दानों में अभयदान श्रेष्ठ है। वैसे ही सब पर्वों में पर्युषण महापर्व श्रेष्ठ है। तप, जप, स्वाध्याय, ध्यान की सरिताएँ वेगवती बनकर बहने लगती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ शासनश्री साध्वी सुमनप्रभा जी ने आगम वाचन के द्वारा किया गया। शासनश्री साध्वी सुव्रतांजी ने खाद्य संयम के संदर्भ में कहा कि प्रत्येक साधना का प्रारंभ खाद्य संयम की साधना के साथ होता है। साध्वी कार्तिकप्रभा जी एवं साध्वी चिंतनप्रभा जी ने सुमधुर स्वरों में गीत की प्रस्तुति दी। अंत में सुरेंद्र मालू पीतमपुरा सभा के मंत्री ने आठ दिनों में होने वाले कार्यक्रमों की अवगति दी। पीतमपुरा महिला मंडल ने मंगल गीत का संगान किया।
कार्यक्रम में त्रिनगर राजेंद्र नगर, कीर्तिनगर, मानसरोवर, शालीमार बाग, करोल बाग आदि विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित हुए।
स्वाध्याय दिवस के संदर्भ में शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने कहा कि आगम में स्वाध्याय के पाँच भेद बताए हैं। वाचना, पृच्छना, परिवर्तना, अनुप्रेक्षा और धर्मकथा। अनुप्रेक्षा और धर्मकथा के द्वारा सत्य का ज्ञान होता है। भगवान महावीर ने कहा कि स्वाध्याय से ज्ञानावरण और दर्शनावरण कर्म क्षीण होते हैं। इसी संदर्भ में साध्वी चिंतनप्रभा जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। महिला मंडल, त्रिनगर ने मंगलाचरण किया।
सामायिक दिवस-आचार्यप्रवर के द्वारा निर्देशित सामायिक दिवस पर तेयुप, दिल्ली ने मंगलाचरण किया। अभिनव सामायिक का शुभारंभ साध्वी चिंतनप्रभा जी द्वारा चिपदी वंदना के प्रयोग द्वारा किया गया।
शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने त्रिगुप्ति की साधना, दीर्घ श्वास प्रेक्षा, स्वाध्याय आदि का प्रयोग कराया। तेयुप द्वारा समायोजित सामायिक दिवस पर 503 सामायिक हुई। कार्यक्रम के अंत में साध्वीवृंद ने सुमधुर गीत का संगान किया।
अणुव्रत चेतना दिवस पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने अपने वक्तव्य में ऐतिहासिक पुरुष 23वें तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ के जीवन प्रसंग सुनाए। शासनश्री साध्वी सुमनप्रभा जी ने अणुव्रत के संदर्भ में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अणुव्रत जीवन निर्माण की सुंदर प्रक्रिया है। सुखमय जीवन जीने की चाबी है। यह असांप्रदायिक धर्म का प्रारूप है। यह प्रत्येक व्यक्ति को जैन नहीं गुड मैन बनाने की प्रेरणा देता है।
अणुव्रत चेतना दिवस का शुभारंभ अणुव्रत समिति, दिल्ली के उपाध्यक्ष कमल एवं अन्य व्यक्तियों ने अणुव्रत गीत से किया। महिला मंडल, कीर्तिनगर ने एवं साध्वीवृंद ने गीत का संगान किया।
जप दिवस पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने भगवान महावीर के 27 भवों के विषय में प्रस्तुति दी। आत्मा का उत्कर्ष और अपकर्ष होता रहता है। ऐसी कोई गति नहीं, जाति नहीं और ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ आत्मा ने जन्म नहीं लिया है। परंतु कोई स्वर्णिम क्षण ऐसा आता है, जिसमें कर्मों के हलकापन से आत्मा उत्कर्ष की ओर कदम बढ़ा लेती है। साध्वी कार्तिकप्रभा जी ने जप का महत्त्व बताते हुए कहा जप के साथ जुड़ा हुआ प्रश्न है आस्था का। बहुत लोग जप करते हैं, पर उसके प्रति संदेहशील रहते हैं। लाभ मिलेगा या नहीं। वह संदेह सफलता में बाधक बनता है। यदि विधिवत बीज वपन होता है तो अवश्य फल तिमलता है।
दिल्ली सभा के अध्यक्ष सुखराज सेठिया, मंत्री प्रमोद घोड़ावत, कल्याण परिषद के सदस्य शांतिलाल जैन, तेयुप के अध्यक्ष विकास जैन ने अपने विचार व्यक्त किए।
साध्वी सुव्रतां जी ने आचार्यश्री महाश्रमण जी के 51वें दीक्षा महोत्सव पर हनुमान सेठिया ने 51 दिनों की तपस्या की है, उसका जिक्र करते हुए भविष्य में आगे बढ़ने के लिए शुभकामना व्यक्त की। कार्यक्रम का संयोजन सुरेंद्र मालू ने किया।
ध्यान दिवस पर महिला मंडल ने प्रेक्षा गीत का संगान से मंगलाचरण किया। शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने प्रेक्षाध्यान के प्रयोग-कायोत्सर्ग, दीर्घश्वास प्रेक्षा, चैतन्य केंद्र प्रेक्षा अंतर्यात्रा के प्रयोग कराए।
अंत में शासनश्री साध्वी सुव्रतांजी ने प्रेक्षाध्यान के संदर्भ में कहा कि प्रेक्षाध्यान का अर्थ है-अतीत और अनागल से मुक्त हो वर्तमान में जीना, स्मृति कल्पना से मुक्त हो यथार्थता में जीना, प्रियता-अप्रियता से मुक्त हो समता में जीना, चिंता-व्यथा से मुक्त हो चेतना के शुद्ध धरातल पर जीना। प्रेक्षाध्यान एक रसायन है, जिसके सेवन से शरीर ही नहीं आत्मा भी पुष्ट होती है।
संवत्सरी महापर्व पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने अपने उद्गार व्यक्त किए। शासनश्री साध्वी सुव्रतांजी ने जैन धर्म की प्रभावना आचार्य परंपरा एवं तेरापंथ की यशस्वी आचार्य परंपरा, साध्वी चिंतनप्रभा जी ने तेरापंथ धर्मसंघ की साध्वीप्रमुखा परंपरा पर विस्तृत प्रकाश डाला। महासभा के उपाध्यक्ष संजय खटेड़ ने भाव व्यक्त किए।
प्रारंभ में शासनश्री साध्वी सुमनप्रभा जी ने गजसुकुमाता, साध्वी कार्तिकप्रभा जी ने शालिभद्र का जीवन-वृत्त सुनाया। तपस्याएँ एवं पौषध अतिमात्रा में हुए। महाप्रज्ञ के जीवन के प्रेरणादायी प्रसंग महासभा के उपाध्यक्ष संजय खटेड़ ने सुनाए। संघ गान के साथ कार्यक्रम परिसंपन्न हुआ।
क्षमायाचना दिवस पर शासनश्री साध्वी रतनश्री जी ने कहा कि दुनिया में अनेक प्रकार की शक्तियाँ हैं। पर सबसे बड़ी शक्ति क्षमा की है। भगवान महावीर ने अपनी प्रांजल वाणी में कहा-सबके साथ मेरी मैत्री है, वैर किसी के साथ नहीं है। जिसके हाथ में क्षमा का शस्त्र है उसका शत्रु कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। जहाँ घास-फूस नहीं है, वहाँ पेड़ हुए अग्नि के कण अपने आप बुझ जाते हैं। अपने दिल को विशाल बनाकर मैत्री मंत्र का प्रयोग करें।
शासनश्री साध्वी सुव्रतांजी ने कहा कि आपने आज से आठ दिन पहले हिमालय पर आरोहण करना शुरू कर दिया। कल संवत्सरी के दिन शिखर पर पहुँच गए, आज क्षमापना दिवस पर हिमालय की चोटी पर क्षमा की ध्वजा फहराना है। वह कुशलतापूर्वक फहराएँ तो आपकी आठ दिन की गई साधना, आराधना सफलतम होगी।
आप सरल हृदय से क्षमा लें और दें। अंत में सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए क्षमा का आदान-प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी कार्तिकप्रभा जी, साध्वी चिंतनप्रभा जी ने महावीर अष्टकम से किया।