आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

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आचार्य भिक्षु चरमोत्सव के आयोजन

उधना
आचार्य भिक्षु का 221वाँ चरमोत्सव मुनि उदित कुमार जी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में मनाया गया। इस अवसर पर मुदि उदित कुमार जी ने कहा कि आचार्य भिक्षु महान साधक थे। वे सत्य के अन्वेषक थे। अनुशासन के हिमायती थे। धर्म के क्षेत्र में शिथिलाचार उन्हें कतई पसंद नहीं था। जेन आगमों में निर्देशित साधुता के नियमों के संनिष्ठ पालन हेतु वे सदा आग्रही रहे। मुनिश्री ने आगे कहा कि आचार्य भिक्षु की सहिष्णुता एवं धैर्य प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है। वे कभी किसी की व्यक्तिगत आलोचना नहीं करते थे। उनकी आलोचना करने वाले विरोधियों के दिल भी वे अपनी विनोद वृत्ति से जीत लेते थे। वे जीवन के अंत समय तक सतत जागरूक एवं सक्रिय रहे।
मुनि अनंत कुमार जी ने कहा कि आचार्य भिक्षु भगवान महावीर के सिद्धांतों के प्रखर पुरस्कर्ता थे। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था। अहिंसा की आराधना के लिए वे अपरिग्रह को अपनाने की विशेष प्रेरणा देते थे। तेममं, उधना द्वारा मंगलाचरण किया गया। भिक्षु भजन मंडली, उधना ने आचार्य भिक्षु की स्मृति में गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघ गान किया। सायंकालीन कार्यक्रम में भिक्षु भजन संध्या का आयोजन मुनिश्री की निश्रा में किया गया।