दादा-दादी चित्त समाधि शिविर का आयोजन

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दादा-दादी चित्त समाधि शिविर का आयोजन

चेन्नई।
साध्वी लावण्यश्री जी के सान्निध्य में श्रावक समाज की उपस्थिति में ‘दादा-दादी चित्त समाधि शिविर’ का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मंगलाचरण रंजू कोठारी द्वारा किया गया। तत्पश्चात सभा अध्यक्ष उगमराज सांड के द्वारा स्वागत स्वर में आगंतुकों का स्वागत किया गया। हेमंत डूंगरवाल ने मधुर गीतिका का संगान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुधीर कांकरिया थे। आपका पूरा परिचय सभा के उपाध्यक्ष एम0जी0 बोहरा के द्वारा दिया गया। जिसके उपरांत मुख्य वक्ता ने कहा कि दादा-दादी हमारे जीवन के अमूल्य रत्न हैं। उनके साथ वक्त बिताने से हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को सीखते हैं। वो हमारे जीवन का अमल्य हिस्सा हैं। साध्वी दर्शितप्रभा जी ने अपने जीवन के पारिवारिक अनुभव को बताया कि हम संयुक्त परिवार में कैसे रहते थे, बड़े बुजुर्गों के साथ में रहने से कितना फायदा है। आज के विषय पर सुंदर विवेचना की। इसी क्रम में साध्वी सिद्धांतश्री जी ने अपने विचार व्यक्त किए।
साध्वी लावण्यश्री जी ने कहा कि दादा-दादी हमारे लिए एक आदर्श हैं। जीवन में सफलता और असफलता के किस्से सुनाकर महत्त्वपूर्ण सीख हमें देते हैं। दादा-दादी सदियों से घर की शान रहते हैं। आज विशेष रूप से दादा-दादी के लिए आयोजित कार्यक्रम में बुजुर्गों के चेहरे पर एक अलग खुशी देखने को मिली, जिसे देखकर हर कोई भाव-विभोर हो गया। कार्यक्रम के संयोजक संपतराज चोरड़िया के अथक प्रयास से यह दादा-दादी चित्त समाधि शिविर रोचक रहा। आभार ज्ञापन सभा के मंत्री अशोक खतंग ने किया।