माँ का दिशाबोध, बेटी की उड़ान कार्यशाला का आयोजन

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माँ का दिशाबोध, बेटी की उड़ान कार्यशाला का आयोजन

जसोल।
अभातेममं के तत्त्वावधान में तेममं द्वारा शासनश्री साध्वी सत्यवती जी के सान्निध्य में अध्यक्ष कंचनदेवी ढेलड़िया की अध्यक्षता में ‘माँ का दिशाबोध, बेटी की उड़ान’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। साध्वीश्री जी द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महिला मंडल की माताओं द्वारा प्रेरणा गीत से मंगलाचरण किया गया। उपाध्यक्ष सरोज भंसाली ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। अरुणा डोसी ने बताया कि इस कार्यशाला में लगभग 15 माँ-बेटी के जोड़ों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया।
सभी जोड़ों ने कहा कि भगवान हर जगह नहीं पहुँच सकता, इसलिए दुनिया में माँ बनाई। माँ-बेटी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है जो जन्म के साथ ही एक-दूसरे से अंतरंग जुड़ाव होता है। माँ ही बेटी की पहली टीचर होती है और माँ ही सबसे अच्छी दोस्त, जो हमेशा, हरपल साथ निभाती है। साध्वी शशिप्रभा जी ने कहा कि दुनिया में सबसे नजदीकी रिश्ता माँ और बेटी का होता है। क्योंकि बेटी माँ की परछाई होती है। उसमें माँ के गुण कुछ देखकर, कुछ सीखकर आते हैं। साध्वीश्री जी ने आगे कहा कि माँ आज के जमाने की हो या पुराने जमाने की, राजा महाराजा की हो या तीर्थंकर की, वो अपने बच्चों को गर्भ से ही आध्यात्मिक, सामाजिक, वीर योद्धा बनाने के संस्कार देने की कोशिश करती है।
कार्यक्रम में माँ बेटी के प्रश्न-उत्तर राउंड, माँ-बेटी का तानाबाना राउंड, कुछ वन मिनट गेम भी खिलाए। इसमें प्रथम स्थान माँ पुष्पा बुरड़, दूसरे स्थान पर हेमा बाघमार, तीसरे स्थान पर कंचन ढेलड़िया रही। बाकी जोड़ों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। निर्णायक की भूमिका जया दिग्गा व अर्चना मोहता ने निभाई। कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष जयश्री सालेचा ने किया। आभार ज्ञापन महामंत्री डिंपल सालेचा ने किया। मंजु भंसाली, चंदा मेहता, मीना भंसाली का अच्छा सहयोग रहा।