'शासनश्री' साध्वीश्री सोमलता जी के प्रति चारित्रात्माओं के उद्गार

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–'शासनश्री' साध्वी कंचनप्रभा

'शासनश्री' साध्वीश्री सोमलता जी के प्रति चारित्रात्माओं के उद्गार

युगप्रधान परम पावन आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा-आशीर्वाद से 'शासनश्री' साध्वी सोमलता जी को रात्रि में साध्वी शकुंतलाजी ने तिविहार संथारे का प्रत्याख्यान करवाया तथा उसी प्रकार चढ़ते परिणामों में उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी ने चौविहार संथारे का प्रत्याख्यान करवाया। यह स्वयं सोमलताजी के लिए अति गौरव की बात है। साध्वी सोमलता जी ने अमित आत्मबल का परिचय दिया है, यह गुरु भक्ति का आशीर्वाद है। साध्वी सोमलता जी ने भीषण वेदना में सहनशीलता क्षण-क्षण में वर्धमान रखी है, बहुत कर्म निर्जरा हुई है। चारों साध्वियों की सेवा- परिचर्या अनुकरणीय है। कमल कुमार जी स्वामी का भी है सौभाग्य है कि उन्हें यह शुभ अवसर मिला। भाई विजय सिंह आदि पूरे बैद परिवार ने समय-समय पर अच्छी सेवा की है। दादर श्रावक समाज का भी सौभाग्य है कि यह आध्यात्मिक भव्य नजारा देखने को मिला।