एक वर्ष के प्रवास से जगी 'धार्मिक चेतना' की अलख

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बीकानेर, गंगाशहर।

एक वर्ष के प्रवास से जगी 'धार्मिक चेतना' की अलख

बीकानेर के गंगाशहर क्षेत्र में धर्म, अध्यात्म और तपस्या की गंगा बहाने के पश्चात, उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी का 'गुरू दर्शन' हेतु लाड़नू की ओर विहार निश्चित हो गया है।संयम और साधना का जीवंत संदेश- तेरापंथ न्यास के ट्रस्टी जैन लूणकरण छाजेड़ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मुनिश्री का सान्निध्य त्याग और आत्मसंयम का अमूल्य संदेश प्रदान करता है। उन्होंने कहा, 'मुनिश्री ने सिखाया कि साधना केवल वाणी तक सीमित नहीं, बल्कि उसे आचरण में उतारना चाहिए। अल्प समय में आपने हमारे हृदयों में जो संस्कार रोपे हैं, वे सदैव हमारा मार्गदर्शन करेंगे।'
शिक्षा और अध्यात्म का अनूठा संगम- आचार्य श्री तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष गणेश बोथरा ने मुनिश्री के प्रवास को बीकानेर क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया। प्रवास काल की ऐतिहासिक उपलब्धियां- सभा मंत्री जतन लाल संचेती ने कहा घर घर में प्रवचनों की श्रृंखला की शुरुआत हुई जिससे हजारों लोगों को घर बैठे धर्म ओर अध्यात्म से जुड़ने का मौका मिला। तपस्या का कीर्तिमान- मुनिश्री की प्रेरणा से 48 लोगों ने वर्षीतप, 12 जनों ने मासखमण और 115 से अधिक श्रावकों ने 8 या अधिक दिवस की तपस्या की। संस्कार और सेवा- 'जैन संस्कार विधि' का व्यापक प्रचार हुआ और 13 कार्यकर्ताओं ने 'उपासक' बनने हेतु संकल्पित हुए।