अहिंसा, संयम और तप की साधना करना है मंगल : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 06 फरवरी, 2026

अहिंसा, संयम और तप की साधना करना है मंगल : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी शुक्रवार प्रातः काल लाडनूं में ही स्थित बरड़िया परिवार के आवास भाग्य श्री भवन से गतिमान हुए। आज के बहुप्रतीक्षित दिवस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु लाडनूं पहुँचे थे। लाडनूं का तेरापंथ समाज ही नहीं, अपितु अन्य जैन एवं जैनत्तर समाज भी मानवता के संदेश का अभिनन्दन करने उत्सुक नजर आ रहा था। विमल विद्या विहार सहित लाडनूं के कई विद्यालयों के विद्यार्थी और श्रद्धालु बहु अगवानी हेतु पंक्तिबद्ध खड़े थे। पूज्य गुरुदेव तेरापंथ धर्मसंघ के नवम् अधिशास्ता आचार्य श्री तुलसी की जन्मस्थली पधारे। वहां दर्शन-वन्दन के पश्चात् शांतिदूत लाडनूं वासियों पर मंगल आशीष वृष्टि करते हुए जैन विश्व भारती की ओर पधारे। साधु, साध्वी, समणी व मुमुक्षु वृंद कतारबद्ध थे। इनके मध्य तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य योगक्षेम वर्ष के महामंगल प्रवेश के लिए गतिमान हुए तो पूरा लाडनूं नगर जयघोष से गूंज उठा। पूर्व निर्धारित शुभ मुहूर्त दस बजकर दस मिनट पर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने जैन विश्व भारती परिसर में बने ‘महाश्रमण विहार’ में योगक्षेम वर्ष के लिए नवीन रूप से महामंगल प्रवेश किया।
योगक्षेम वर्ष के लिए नवीन रूप से निर्मित सुधर्मा सभागार में अपार जन समूह उपस्थित था। इस मंगल अवसर पर आचार्य श्री की अभिवंदना में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक श्री गुलाब कोठारी भी उपस्थित थे। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के मुख्य समारोह का शुभारंभ हुआ। तेरापंथ महिला मंडल लाडनूं ने मंगल स्तुति की प्रस्तुति दी। जैन विश्व भारती लाडनूं में प्रवाहित साध्वीवृंद व समणी वृंद ने संयुक्त रूप से गीत का संगान किया। साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभाजी ने इस अवसर
पर जनता को उद्बोधित करते हुए शासन माता साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी की स्मृति की और कहा कि उनके निवेदन को आचार्य श्री ने बहुमान देते हुए इस धरती पर योगक्षेम वर्ष करना स्वीकार किया। उन्होंने आचार्यश्री की अभिवंदना में अपनी अभिव्यक्ति दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सुधर्मा सभा पट्ट का अनावरण किया। योगक्षेम वर्ष व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, स्वागताध्यक्ष राकेश कठोतिया, जैन विश्व भारती अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़, जैन विश्व भारती लाडनूं मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति बच्छराज दूगड़ ने भी अभिव्यक्ति दी।
अखंड परिव्राजक आचार्य श्री महाश्रमण जी ने समुपस्थित जन समूह को पावन पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि शास्त्र में धर्म को उत्कृष्ट मंगल कहा गया है। व्यक्ति को मंगल की चाह होती है कि वह जो कार्य करे वह निर्विघ्नता के साथ सम्पन्न हो, सफलता को प्राप्त हो। मंगल कामना स्वयं के लिए भी और दूसरों के लिए भी की जाती है। दूसरों के लिए मंगल कामना करना एक उच्चता का द्योतक होता है। मंगल के लिए व्यक्ति प्रयास भी कराता है और कई पदार्थ जैसे गुड़ आदि प्रयोग में आते हैं। शुभ मुहूर्त में भी कार्यारंभ करने का प्रयत्न किया जाता है। परन्तु आगमकार ने अमूल्य बात कही कि सबसे बड़ा मंगल धर्म है। शास्त्रकार ने मंगल के रूप में किसी धर्म का नाम न लेते हुए कमाल की बात कही कि अहिंसा धर्म है, संयम धर्म है और तप धर्म है। अहिंसा, संयम की साधना जो करेगा, तप जो भी तपेगा उसका मंगल होगा।
आज हम योगक्षेम वर्ष के लिए जैन विश्व भारती लाडनूं में प्रविष्ट हुए हैं। 6 फरवरी को प्रवेश हुआ है और संभवतः 24 फरवरी 2027 को यहाँ से प्रस्थान का कार्यक्रम है। साधिक एक वर्ष का यह समय है। योगक्षेम वर्ष की पुनरावृत्ति होने की संभावना है। हमारे परम पूजनीय गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी व युवाचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के समय में 1989 में योगक्षेम वर्ष इसी जैन विश्व भारती परिसर में आयोजित हुआ था। आज लगभग 37 वर्ष के बाद पुनः योगक्षेम वर्ष के प्रवेश के साथ प्रवेश हुआ है। लाडनूं जो गुरुदेव तुलसी की जन्मभूमि है, मैं उनके जन्म स्थान में जाकर आया हूँ। योगक्षेम वर्ष की आयोजना हमारी साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी के निमित्त से हुई है। परम पूज्य आचार्य श्री तुलसी ने जैन विश्व भारती की स्थापना की। यह संस्था मुझे बहुत महत्वपूर्ण संस्था लगी है। जहां साधना, सेवा, साहित्य आदि के अनेक रूप जुड़े हुए हैं।
आज हमारे राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री जी का आगमन हुआ है। आपने आगे भी अनेक बातें कही है। मेरा तो कहना है कि जब दुबारा आओ तो दो-तीन घंटे नहीं, दो-तीन दिनों के लिए आएँ ताकि अनेक संदर्भों में चर्चा-परिचर्चा हो सके। राजस्थान पत्रिका के गुलाबजी कोठारी भी उपस्थित हैं। योगक्षेम वर्ष के लिए कितने-कितने साधु, साध्वियाँ व समणियाँ भी आई हैं। आज मुख्य मुनि का दीक्षा-दिवस भी है। पूज्य प्रवर ने साध्वी प्रमुखा जी व साध्वी वर्याजी का परिचय भी प्रदान किया और जैन विश्व भारती में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। इस लंबे प्रवास का सभी अच्छा उपयोग करें। हमारा प्रवास मंगलमय हो, सभी अच्छा पुरूषार्थ करें। आचार्य प्रवर की अभिवंदना में नगरपालिका लाडनूं अध्यक्ष रावत खान ने नगरपालिका की ओर से अभिनंदन पत्र आचार्य प्रवर को समर्पित किया। गुलाब कोठारी संपादक राजस्थान पत्रिका, ने कहा कि आज का दिन बड़े उत्सव का दिन है, योगक्षेम वर्ष की शुरुआत है। आचरण धर्म का सबसे बड़ा लक्षण है। धर्म संस्कृति की नींव है। मैं बड़ा सौभाग्यशाली हूं कि मुझे आचार्यश्री महाश्रमण जी की मंगल
सन्निधि प्राप्त हो रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने अपनी भावाभिव्यक्ति में कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन पदार्पण पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। आचार्य श्री का यहां पधारना राजस्थान के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। आप का यहाँ एक वर्ष का प्रवास है, निश्चित ही आपकी तपस्या और आपकी वाणी का सभी को लाभ होगा। आप एक धर्म गुरु नहीं, आप मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। आपकी साधना, आपका ज्ञान लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आपने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित किया है। आपका योगदान केवल जैन समाज के लिए ही नहीं, सम्पूर्ण मानवता के लिए वरदान है। आज मुझे एक साथ इतने साधु-साध्वियों के दर्शन का लाभ मिला है यह गौरव की बात है। आचार्य प्रवर के मंगल पाठ के साथ आज के जैन विश्व भारती में प्रवेश से संदर्भित कार्यक्रम का समापन हुआ।