मनुष्य जन्म का मिलना है दुर्लभ और महत्वपूर्ण बात :आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

सिंघाना गांव। 03 फरवरी, 2026

मनुष्य जन्म का मिलना है दुर्लभ और महत्वपूर्ण बात :आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, महातपस्वी युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी आज मंगलवार प्रातः अपनी धवल सेना के साथ गतिमान हुए और लगभग 12 किमी का विहार कर सिंघाना गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। विद्यालय परिसर में विद्यालय परिवार ने पूज्य प्रवर का भावभीना स्वागत किया। आज मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के साथ ही पूज्य प्रवर की सन्निधि में सिंघाना मण्डल द्वारा विराट हिन्दू सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि शास्त्र में चार चीजें दुर्लभ बताई गई हैं - मनुष्य जन्म का मिलना, उच्च कुल में जन्म, धर्म का श्रवण, व धर्म में श्रद्धा और संयम में पराक्रम। मनुष्य जन्म यदि मिल जाए तो जीवन कैसे जीया जाए यह महत्त्वपूर्ण बात है। व्यक्ति को अच्छे लक्ष्य के साथ जीवन जीना चाहिए। मनुष्य एक चिंतनशील और विवेकशील प्राणी है। शास्त्र में कहा गया कि पूर्व कर्मों का नाश करने के लिए इस देह का धारण करना चाहिए।
मनुष्य जीवन को यदि वृक्ष मान लिया जाए तो छः फल मनुष्य जीवन रूपी वृक्ष के लगने चाहिए। उसमें पहला बताया गया है - जिनेश्वर भगवान की भक्ति करें, नाम स्मरण करें। दूसरा है - गुरु की पर्युपासना करें। तीसरा फल-सभी प्राणियों के प्रति करूणा का भाव रखना। अपनी ओर से किसी को कष्ट देने का व्यर्थ प्रयास न करें। चौथा फल है - सुपात्र दान देना। पांचवां फल है - गुणों के प्रति अनुराग, और छठा फल-आगम वाणी का श्रवण व स्वाध्याय। इस प्रकार यदि मनुष्य जीवन रूपी वृक्ष पर ये फल लगते हैं तो उसका जीवन सफल हो सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि सभी में सद्भावना हो, जीवन में नैतिकता रहे और जीवन नशामुक्त रहे। आचार्य प्रवर ने उपस्थित विद्यार्थियों व जनता को सद्भावन, नैतिकता, व नशामुक्ति की प्रेरणा दी तथा विद्यार्थियों व उपस्थित लोगों को संकल्पों का स्वीकरण करवाया। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन से पूर्व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संचालक हरदयाल ने उपस्थित जनता को संबोधित किया। मंगल प्रवचन के पश्चात् विद्यालय के प्रधानाचार्य छोटूराम भाकर ने अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति दी।