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आचार्य महाप्रज्ञ नॉलेज सेंटर का हुआ भव्य उद्घाटन
तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF), बीकानेर द्वारा आचार्य महाप्रज्ञ नॉलेज सेंटर (AMKC) का भव्य उद्घाटन गंगाशहर के चोरडिया चौक स्थित केंद्र परिसर में अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में समाजसेवी गणेश बोथरा एवं महावीर रांका द्वारा किया गया। समारोह को पावन सान्निध्य प्रदान करते हुए मुनि अमृत कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “ज्ञान की शक्ति सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। युवाओं का विकास और उनके भीतर नेतृत्व क्षमता का निर्माण राष्ट्र के विकास के लिए अनिवार्य है।” उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ जी के दूरदर्शी चिंतन का उल्लेख करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता और आधुनिक ज्ञान का समन्वय ही समाज को सही दिशा प्रदान कर सकता है। मुनिश्री जी ने कहा कि AMKC ज्ञान-विकास का सशक्त माध्यम बनकर गंगाशहर एवं संपूर्ण अंचल के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा तथा TPF द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक प्रयासों की भी प्रशंसा की। TPF राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत मांडोत ने अपने वक्तव्य में AMKC के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम ने देशभर के प्रोफेशनल्स को एक ऐसे मंच पर जोड़ा है, जहाँ आध्यात्मिकता का भी सशक्त जुड़ाव है। वर्तमान में फोरम के 11,000 से अधिक सदस्य समाज और संघ के लिए निरंतर सेवा कर रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि गंगाशहर स्थित AMKC भविष्य में वर्ल्ड क्लास CA कोचिंग सेंटर के साथ-साथ IAS-IPS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का भी केंद्र बनेगा। इस अवसर पर बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन समाज का बीकानेर के विकास में विशेष योगदान रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आचार्य महाप्रज्ञ नॉलेज सेंटर भविष्य में बीकानेर के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध होगा।
सीए सोहनलाल बैद ने अपने प्रेरणा दायी विचार व्यक्त करते हुए AMKC में प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अनेक विद्यार्थी कोचिंग के लिए जयपुर, जोधपुर एवं अहमदाबाद जैसे शहरों में जाकर दूर रहकर लाखों रुपये खर्च करते हैं। यदि वही सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाती हैं, तो यह समाज के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होगा। कार्यक्रम के अंत में TPF महामंत्री श्री मनीष कोठारी द्वारा आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन विधि का संपादन जैन संस्कार विधि से किया गया।