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चिकित्सा सेवा कार्यो में सहभागी सदस्यों का सम्मान समारोह
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर ने आज शान्तिनिकेतन सेवा केन्द्र में विराजित चरित्र आत्माओं की चिकित्सा सेवा कार्यो में जुड़े हुए व्यक्तियों का सम्मान समारोह सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशदप्रज्ञा जी एवं साध्वी लब्धियशा जी के सान्निध्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए साध्वी विशदप्रज्ञा जी ने कहा कि तेरापंथ धर्म संघ में दीक्षित होने से व्यक्ति अपने सम्पूर्ण जीवन के प्रति निश्चित हो जाता है। आचार्य श्री भिक्षु ने ऐसी व्यवस्था बनाई है सभी कार्य व्यवस्थित रूप से हो जाते हैं। तेरापंथ संघ का एक अनोखी विशेषता है कि संघ के सभी सदस्य आश्वस्त है कि वृद्धावस्था, बीमारी, अथवा अन्य कोई दुर्घटना की स्थिति में उनकी अच्छी से अच्छी सेवा सुश्रूषा होगी।
इस प्रकार संघ का प्रत्येक सदस्य अपने आप में निश्चित है कि उसके अन्य सहयोगी संत उसकी सर्वोत्तम सेवा करेंगे। आचार्य श्री पूरा ध्यान रखते हैं। किसी साधु साध्वियों को किसी भी परिस्थिति में असहाय होने का कोई भय नहीं है। आज तेरापंथ धर्म संघ में अवस्था प्राप्त, रूग्ण, किसी भी प्रकार की शारिरिक विवशता की वजह से साधु साध्वियों के लिए सेवा केन्द्रों कि व्यवस्था की हुई है। जिसमें उनकी सेवा की जाती है। आचार्य श्री महाश्रमण जी ने सेवा केन्द्रों को तेरापंथ धर्मसंघ के तीर्थ स्थल के रूप में पहचान प्रदान की है। परिवार में सेवा भावना के संस्कार आते है। जिससे आम जन में सेवा भावना बढ़ती है जो भविष्य में परिवारों में बुढ़ापे में सेवा को सुरक्षित बनाते है। साध्वी विशदप्रज्ञा जी ने कहा कि आचार्य श्री भिक्षु ने कहा कि जो साधु रोगी, वृद्ध और ग्लान साधुओं की सेवा नही करता, वह भगवान् की आज्ञा का उल्लंखन करता है। उसके मोहनीय कर्म का बंधन होता है। उसके इह लोक ओर परलोक दोनों बिगड़ जाते है।तेरापंथ धर्म संघ में प्रत्येक साधु साध्वियों को तीन चाकरी तीन साल तक सेवा करना अनिवार्य है। सेवा का पुरा विधान है। यह अद्वितीय सेवा व्यवस्था की संकल्पना आचार्य भिक्षु की एक महान देन है। वर्तमान समाज व्यवस्था के संदर्भ में यह चिंतन का विषय है की किस प्रकार समाज में सेवा के ऐसे कार्य को स्थापित किया जा सकता है। आज तेरापंथ सभा गंगा शहर में जो सेवा करने वाले ग्रहस्थ लोगों का सम्मान किया है । यह भी एक प्रेरणादायी कार्य है। कार्यक्रम में अमर चन्द सोनी अपने विचार व्यक्त किये। चिकित्सा सेवा प्रभारी निर्मल तातेड़ ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सभा मंत्री जतनलाल संचेती ने किया।