संस्थाएं
संस्कार और प्रज्ञा का संगम : ज्ञानशाला वार्षिक सम्मेलन
ज्ञानशाला का वार्षिक सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की चेतना को संस्कारित करने का एक उत्सव रहा। शासनश्री मुनि विमलकुमार जी एवं मुनि उदितकुमार जी के पावन सान्निध्य में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। मुनि विमलकुमार जी ने कहा कि ज्ञानशाला उर्वरा भूमि है। ज्ञानशाला के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि उदितकुमार जी ने शिक्षा के मर्म को विस्तार देते हुए कहा- आज मस्तिष्क की प्रखरता से अधिक हृदय की सुचिता की आवश्यकता है। सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति को आत्म-अनुशासन और संयम से साक्षात्कार कराए।
ज्ञानशाला का ध्येय बालक को केवल सफल बनाना नहीं, बल्कि उसे जीवन के शाश्वत मूल्यों से जोड़ना है। अभिव्यक्ति और अनुभव- कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तेरापंथ सभा दिल्ली की 13 ज्ञानशालाओं के बच्चों की प्रस्तुतियां रहीं, जिनमें कला और संस्कारों का अद्भुत सामंजस्य दिखा। एक विशेष पॉडकास्ट सत्र में राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रकोष्ठ के संयोजक सोहनराज चोपड़ा ने अपने 28 वर्षों के अनुभवों का निचोड़ साझा करते हुए बाल पीढ़ी को सकारात्मक दिशा में बढ़ने की प्रेरणा दी।
कृतज्ञता और सम्मान- इस अवसर पर ज्ञानशाला दिल्ली के संयोजक महिम बोथरा, तेरापंथ सभा दिल्ली के अध्यक्ष सुखराज सेठिया, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सुमन नाहटा, जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के उपाध्यक्ष संजय खटेड़ एवं अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। अंतिम सत्र में उन प्रशिक्षिकाओं और ज्ञानार्थियों को सम्मानित किया गया। जिन्होंने पूरे वर्ष निष्ठा और अनुशासन का परिचय दिया। कार्यक्रम का पहला चरण ज्ञानशाला की दो ज्ञानार्थी आलाया और उदिता एवं द्वितीय चरण अशोक सेठिया के सुव्यवस्थित संचालन और श्वेता हीरावत के आभार ज्ञापन के साथ यह सम्मेलन गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।