प्रिय की अपेक्षा सत्य बोलने का ज्यादा मूल्य है  : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं, 12 मार्च 2026

प्रिय की अपेक्षा सत्य बोलने का ज्यादा मूल्य है : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने योगक्षेम वर्ष के अन्तर्गत आज के विषय ‘भाषा विवेक’ पर अपनी मंगल देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि साधु के तेरह नियम हैं - पांच महाव्रत, पांच समिति और तीन गुप्ति। इन तीनों में वचन या भाषा को दूसरा स्थान मिला है। पांच महाव्रतों में दूसरा सर्व मृषावाद विरमण, पांच समितियों में दूसरी समिति भाषा समिति और तीन गुप्तियों में दूसरी गुप्ति वचन गुप्ति इन तीनों में भाषा को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। साधु का दूसरा महाव्रत सर्व मृषावाद विरमण है। जब बड़ी दीक्षा अर्थात् छेदोपस्थापनीय चारित्र दिलाया जाता है, उस समय विभाग पूर्वक और विस्तार से त्याग होता है। इससे पूर्व सामायिक चारित्र के समय त्याग समुच्चय रूप में ग्रहण करवाया जाता है। सर्व मृषावाद विरमण के संबंध में यह ध्यातव्य है कि हर जगह साधु सत्य बोले ही यह हमारा नियम नहीं है। यदि साधु जीवन भर के लिए मौन ले ले और बोले ही नहीं तो कोई बात नहीं, पर यदि बोले तो सत्य ही बोले, झूठ नहीं बोले। झूठ, अयथार्थ नहीं बोलना, मिथ्या, मृषा नहीं बोलना यह साधु का दूसरा सर्व मृषावाद विरमण महाव्रत है।
शास्त्र में निर्देशित किया गया है कि बिना पूछे कुछ भी मत बोलो। आचार्य विराजे हैं तो उनके समक्ष आवश्यक हो उतनी ही बात करो। अमौलिक या अनाधार मत लिखो और अनपेक्षित भाषा मत बोलो। स्वयं के लेखन और भाषण में व्यक्ति को स्वयं समीक्षा करनी चाहिए। भाषा विवेक के अन्तर्गत हमें अपनी भाषा में से तीन चीजों का पूर्णतया वर्जन कर देना चाहिए। झूठ नहीं बोलना, कपटपूर्ण नहीं बोलना, और कटु नहीं बोलना। यदि हम इन तीनों को दूर कर दें तो हमारी भाषा बहुत बढ़िया हो सकती है। कहा गया है कि मीठा बोलना एक प्रकार का वशीकरण मंत्र है परन्तु उससे भी ऊपर है - यथार्थ बोलना। सत्य बोलो और प्रिय बोलो। अप्रिय सत्य मत बोलो और झूठ हो वैसा प्रिय भी मत बोलो। यदि वचन में यथार्थता नहीं है तो कोरा मीठा बोलने का कोई लाभ नहीं है। प्रिय की अपेक्षा सत्य का ज्यादा मूल्य होता है। मंगल प्रवचन के उपरांत परम पूज्य गुरुदेव ने साधु-साध्वियों, समणियों की जिज्ञासाओं का समाधान प्रदान किया।