योग क्षेम रो अवसर पायो, चार तीर्थ रो मेलो, पुण्याई रो खेलो…

रचनाएं

साध्वी नीतिप्रभा, हिसार

योग क्षेम रो अवसर पायो, चार तीर्थ रो मेलो, पुण्याई रो खेलो…

योग क्षेम रो अवसर पायो,
चार तीर्थ रो मेलो, पुण्याई रो खेलो…।।
गुरु तुलसी स्यूं दीक्षित शिक्षित, लाडाजी स्यु प्रशिक्षित
पाई महाप्रज्ञ की महर नजर, महाश्रमण चरणां अर्पित
तीन-तीन प्रमुखा काल निहारो, अब लियो पथिक पथ रेलो।।
बोम्बे धरा री कोकिला थी, कोकिल सी मधुरी वाणी
अल्प आहारता कलां, कुशलता करती थी अगवाणी
भैक्षव गण सरवर में अब खिल्यो सरोज नवेलो।।
खणं जाणाहि पंडिए, सूक्त सदा सुखकारी
कदम बढे हैं उसी दिशा में, हम जाए बलिहारी
समयं गोयम मा पमायए, लियो मुक्ति रो गेलो।।
सूरवीर री सुरता पर, सूर भी शीश झुकाएं
तीन करण तीन योग से, सरल हदय खमाए
“नीति” करती क्षमा याचना, वन्दन मेरा झेलो।।
लय- नैतिकता की…