गुजराती परिवार का है सुरभित सुन्दर फूल

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शासनश्री साध्वी यशोमती

गुजराती परिवार का है सुरभित सुन्दर फूल

गुजराती परिवार का है सुरभित सुन्दर फूल
किस्मत जीवन में रही, अन्त समय अनुकूल
नय वाणूं उणसित्तर वर्ष तक, संयम के झूले में झूल
पूज्य प्रवर महाश्रमणजी से संथारा किया कबूल।।
निर्मल रक्खा सदा, संयम का दुकूल
चुना रास्ता जीवन में जागृति का माकूल
मोहरोग को सदैव समझा नीरस धूल
जीवन में आया, परिवर्तन अमूल चूल।।
यथासंभव रहती सजग, मुझसे हो न कोई भूल
सरोजिनी नायडू मधुर भाषी, थी न तीखी शूल
आठ ठाठ से दीक्षा गुरूकुल, अग्रगण्य कारूल
अंतिम अनशन आराधन, कर रही कर्म निर्मूल
वरो मोक्ष साध्वी सरोज, तन छोड यही पर स्थूल।।