अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विविध आयोजन

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विविध आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी सशक्तिकरण पर विशेष कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की कार्यकारिणी सदस्या बंगाल समन्वयक रमण पटावरी विशेष रूप में उपस्थित रही। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेशकुमार जी ने कहा- सृष्टि के दो नियामक तत्त्व है- सृजन और संहार। नारी सृजन चेतना का प्रतीक है। तारे आकाश की कविता है तो नारी धरती का संगीत है। नारी दिल का दरिया व, विनय का वैभव, समर्पण की साधना सहनशीलता उसका स्वभाव है, प्रदान उसका धर्म है, त्याग उसका जीवन है। मुनि ने आगे कहा नारी के अनेकरूप है नारी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती है नारी में क्षमता , दमता, खमता, ममता समता होती है। नारी का स्वस्थ रहना जरूरी है। नारी स्वस्थ है तो घर परिवार स्वस्थ होगा। नारी सशक्त है तो समाज भी सशक्त होगा। नारी सशक्तिकरण के चार सूत्र है आरोग्य ,शिक्षा, स्वावलम्बन सद्‌संस्कार नारी योगों से स्वस्थ रहे। मन में पवित्रता का भाव रहे। ईष्र्या निषेधात्मक भावों से बचे। प्रमोद‌ भावना का विकास करे। आरोग्यता के लिए आहार और वाणी का विवेक रहे। जिससे कुछ सीखा जाए, पाया जाए। वह शिक्षा और विद्या साथ आचार का होना जरूरी है। चरित्र की रक्षा जरूरी है। शिक्षा के साथ सद्संस्कारों का होना जरूरी है। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। शुभकामना श्री जैन श्वताम्बर "तेरापंथी सभा, बाली बेलुड के अध्यक्ष विवेक दुगड़ ने प्रदान की। आभार ज्ञापन मंत्री गु‌लाब बैद ने किया। बाली बेलुड महिला मंडल की सदस्यों ने गीत का संगान किया। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंद जी ने किया।