रचनाएं
महावीर मुझे अब बनना है
अर्हत् वाणी पथ पर चलकर महावीर मुझे अब बनना है।
गुणस्थानों की श्रेणी चढ़कर, महावीर मुझे अब बनना है ।।
सर्वज्ञ जिनेश्वर की वाणी, जो पापहरिणी कल्याणी
शुभ चिन्तन से भावित बनकर, महावीर मुझे अब बनना है।
मैं विजय कषायों पर पाऊं, मैं क्षमाशीलता अपनाऊं
समताधारी साधक बनकर, महावीर मुझे अब बनना है।।
मन की चंचलता को त्यागू, स्थिरता को मैं नित आराधूं
इन्द्रियजय अविकारी बनकर महावीर मुझे अब बनना है।।
मैं राग--द्वेष से मुक्त बनूं, मैं साम्यभाव संयुक्त बनूं
इन भावों में तन्मय बनकर, महावीर मुझे अब बनना है।।
नित कर्मों के बन्धन खोलूं अपनी करनी खुद ही तोलूं
निज आत्मभाव दर्शी बनकर, महावीर मुझे अब बनना है ।।