काश! महावीर तुम लौट के आते

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साध्वी मुक्ताप्रभा

काश! महावीर तुम लौट के आते

काश! महावीर तुम लौट के आते
ओ। ममता की मुझे मीठी मीठी तान सुनाते
काश! महावीर तुम लौट के आते
ओ समता की सूरत। सत्य के दीप जलाते
जिनशासन के महीधर सोई शक्ति जगाते।
सुधामय धार से सिंचित किया नव जीवन को
ओ जगत के ईश्वर दुनिया को बांटा खुशियों का जस्न
जन जन को दिया आर्हत वाङ्मय अमृतवचन
मां त्रिशला ने जन्म दिया करूणामयी सत्य छवि को
वीर जयंती कराती है आत्मोत्थान का सफर
वीर जयंती बगती है भर्वयात्रा का डगर
वीर जयंती करती है मैत्री धृति का संचार
वीर जयंती बनाती है तन मन मस्तिष्क गुलजार
उस महाशक्ति महापुंज को नमन हमारा
महायेागीश्वर अखिलेश्वर को नमन हमारा
उस महासिद्धिदायक महाकीर्ति को नमन हमारा
महाश्रमण महा जगतउधारक महावीर को नमन हमारा
तेज-पुंज शक्तिधर की जंयति आज मनाये
घर घर में शांति सौरभ दीपक महकाये
क्षमा धर्म उपशम भवों के आगर प्रभु
चित्त समाधि अर्हम ज्ञान ज्योति के दीप जलाये